नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में नीदरलैंड से भारत लाई गई प्राचीन चोल कालीन तांबे की थालियों का जिक्र किया। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत की वापसी बताते हुए हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने गंगा डॉल्फिन संरक्षण और केरल की एक अनोखी शैक्षणिक पहल का भी उल्लेख किया।
नीदरलैंड से लौटीं चोल काल की तांबे की थालियां
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी हालिया नीदरलैंड यात्रा को याद करते हुए कहा कि वहां एक विशेष समारोह में सदियों पुरानी चोल कालीन तांबे की थालियां भारत को औपचारिक रूप से सौंपी गईं। इस कार्यक्रम में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने कहा कि इन ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी से देश और विदेश में बसे भारतीयों, खासकर तमिल समुदाय में खुशी की लहर है।
सांस्कृतिक विरासत लौटने पर जताई खुशी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक वस्तुओं की वापसी केवल कलाकृतियों की वापसी नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति के सम्मान की पुनर्स्थापना भी है।
गंगा डॉल्फिन बचाव अभियान की सराहना
प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश में गंगा डॉल्फिन के सफल रेस्क्यू अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक नहर में फंसी डॉल्फिन को बचाने के लिए टीम ने करीब 13 घंटे तक लगातार मेहनत की। इस अभियान में नमामि गंगे परियोजना के तहत शुरू की गई भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस की अहम भूमिका रही।
इलाज के बाद नदी में छोड़ी गई डॉल्फिन
पीएम मोदी ने बताया कि डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद उसका उपचार किया गया और फिर उसे वापस नदी में छोड़ दिया गया। उन्होंने इस कार्य में जुटी टीम के समर्पण और धैर्य की सराहना की।
केरल की 'नदी में चलने वाली कक्षा' का जिक्र
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने केरल की एक अनूठी पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां एक ऐसा स्कूल संचालित हो रहा है, जहां पढ़ाई कक्षा में नहीं बल्कि नदी के बीच आयोजित की जाती है। इस पहल में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी का स्वागत किया जाता है और इसके लिए कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता।
नवाचार और विरासत संरक्षण पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में एक ओर सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने का कार्य हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नवाचार और समाजहित की नई पहलें भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।