पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस–4’ के नए चरण की घोषणा की है। ईरानी सरकारी माध्यमों के अनुसार यह अभियान अब अपने अड़तालीसवें चरण में पहुंच चुका है। इस चरण में कथित रूप से बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइलों का प्रयोग करते हुए कई लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। जारी किए गए एक वीडियो में रेगिस्तानी हवाई पट्टी से कई डेल्टा-विंग ड्रोन को एक साथ उड़ान भरते हुए दिखाया गया है। जैसे ही प्रक्षेपण प्रणाली सक्रिय होती है, तेज नारंगी ज्वाला के साथ ड्रोन हवा में उठते दिखाई देते हैं और उनके पीछे धूल तथा रेत के बादल उड़ते नजर आते हैं।
ड्रोन स्वॉर्म रणनीति का प्रदर्शन
वीडियो में आगे कई ड्रोन को एक साथ समूह बनाकर उड़ते हुए दिखाया गया है, जिसे ईरान ने ‘ड्रोन स्वॉर्म’ रणनीति बताया है। इस रणनीति का उद्देश्य एक ही समय में बड़ी संख्या में ड्रोन को अलग-अलग दिशाओं में भेजकर दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को चुनौती देना होता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार जब कई ड्रोन एक साथ लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं तो उन्हें रोकना अधिक कठिन हो जाता है, जिससे हमले की प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
उत्तरी क्षेत्रों को निशाना बनाने का दावा
ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इस चरण में उत्तरी क्षेत्रों के कई स्थानों को निशाना बनाया गया। इनमें गलील, गोलान और हैफा के आसपास के क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त यह भी दावा किया गया कि क्षेत्र में मौजूद कुछ अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी लक्ष्य बनाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस बयान ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
विभिन्न प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल
ईरानी मीडिया के अनुसार इस अभियान में कई प्रकार की मिसाइलों और ड्रोन का उपयोग किया गया। इनमें खेइबर शिकन और क़द्र जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ हमलावर ड्रोन भी शामिल बताए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन हथियारों की क्षमता लंबी दूरी तक लक्ष्य साधने की है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष की गंभीरता और बढ़ सकती है।
पहले भी किए गए हमलों का दावा
ईरानी सैन्य बलों ने यह भी कहा कि इससे पहले अभियान के सैंतालीसवें चरण में नेगेव क्षेत्र और वहां स्थित एक महत्वपूर्ण हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा बीर शेवा और लोद जैसे शहरों पर भी हमले किए जाने का दावा किया गया। ईरानी मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कतर में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डे को भी इस अभियान के दौरान निशाना बनाया गया था।
सैन्य कार्रवाई के साथ मनोवैज्ञानिक दबाव
रिपोर्टों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि संघर्ष की शुरुआत से अब तक सैकड़ों बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों तथा बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया जा चुका है। साथ ही कुछ क्षेत्रों में चेतावनी संदेश भी भेजे गए हैं, जिनमें लोगों को आने वाले समय में कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर बढ़ती चिंता
पश्चिम एशिया में पहले से ही जटिल सुरक्षा परिस्थितियों के बीच इस प्रकार की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
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