काठमांडू: नेपाल में 26 जुलाई की रात से भड़की भीषण सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब देश को दोबारा 'हिंदू राष्ट्र' घोषित करने की मांग तेजी से जोर पकड़ने लगी है। यह आंदोलन अब केवल रैलियों और विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम जनता सड़कों पर उतरकर सांसदों का घेराव कर उनसे संसद में इस मुद्दे को उठाने की मांग कर रही है।इस जन आक्रोश का ताजा शिकार सिरहा जिले में नेशनल इंडिपेंडेंट पार्टी के सांसद बबलू गुप्ता बने हैं, जिन्हें प्रदर्शनकारियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने देश में बदलाव और हिंदू राष्ट्र की वापसी की उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना था, लेकिन अब जनता की अपेक्षाओं की अनदेखी की जा रही है।
26 जुलाई की हिंसा से भड़का जनआक्रोश
नेपाल में इस वक्त तनाव का माहौल 26 जुलाई की रात से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा के कारण बना हुआ है। हालांकि वर्तमान में स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में है, लेकिन कई इलाकों में अब भी भारी तनाव व्याप्त है। इस हिंसा में कम से कम 3 लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

हिंदू संगठनों ने सौंपा 15 सूत्रीय मांग पत्र
सांप्रदायिक हिंसा के बाद नेपाल के हिंदू संगठनों ने सरकार के सामने 15 सूत्रीय मांग पत्र (Memorandum) रखा है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- हिंदू राष्ट्र की पुनस्र्थापना: नेपाल को तुरंत दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए।
- दोषियों की गिरफ्तारी: सुनसारी जिले के दीवानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच हो और अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाए।
- फायरिंग करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई: घटना के दिन गोली चलाने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई हो।
- शहीद का दर्जा और मुआवजा: हिंसा में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा, उनके परिवारों को मुआवजा और घायलों को समुचित इलाज मिले।
- घुसपैठियों की बेदखली: देश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर किया जाए।
- नागरिकता की जांच: 1990 के बाद नेपाल में दी गई सभी नागरिकताओं की नए सिरे से जांच की जाए और सीमा सुरक्षा को सख्त किया जाए।
20 साल बाद फिर उठी ऐतिहासिक पहचान की मांग
गौरतलब है कि नेपाल दुनिया का इकलौता आधिकारिक हिंदू राष्ट्र हुआ करता था, जहां के राजा खुद को हिंदू धर्म का संरक्षक मानते थे। हालांकि, 2006 के जन आंदोलन के बाद राजशाही का अंत हुआ और 2007 में अंतरिम संविधान के जरिए नेपाल को एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) राष्ट्र घोषित कर दिया गया।अब लगभग 20 साल बाद, देश में बढ़ती सांप्रदायिक घटनाओं और घुसपैठ के बीच एक बार फिर नेपाल को उसकी पुरानी पहचान दिलाने के लिए जनता सड़कों पर उतर आई है।