कोलकाता: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के संगठनात्मक नियंत्रण, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने फिलहाल ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया है। अब दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट आगामी उपचुनाव में इस नाम और चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
TMC में अंतर्कलह के बीच EC का बड़ा फैसला
तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। ऋतब्रत गुट ने पार्टी की संगठनात्मक संरचना और नेशनल वर्किंग कमेटी को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि ममता गुट ने इन दावों को खारिज किया है। चुनाव आयोग के सामने दोनों पक्षों ने पार्टी पर अपने-अपने अधिकार का दावा पेश किया है।
22 जून से बढ़ा विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद 22 जून 2026 को उस समय और गहरा गया, जब ऋतब्रत बनर्जी ने बागी नेताओं की बैठक बुलाकर नई नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन की घोषणा की। अरूप रॉय को इसका चेयरपर्सन चुना गया। ऋतब्रत गुट ने TMC संविधान के अनुच्छेद 20 का हवाला देते हुए संगठनात्मक ढांचे को लेकर सवाल उठाए। वहीं ममता गुट का कहना है कि विरोधी गुट पुराने प्रावधानों पर निर्भर कर रहा है और बाद में हुए संवैधानिक संशोधनों को नजरअंदाज कर रहा है।
चुनाव आयोग के सामने दोनों पक्षों की दलील
पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों ने चुनाव आयोग के सामने अपने दस्तावेज और दावे पेश किए। आयोग ने ऋतब्रत गुट से अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे थे। इसके बाद दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया गया और 17 सितंबर को आयोग ने अंतरिम व्यवस्था पर फैसला किया।
उपचुनाव ने बढ़ाई चुनौती
विवाद ऐसे समय सामने आया, जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। दोनों गुटों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे और दोनों तरफ से TMC के नाम और ‘दो फूल-घास’ वाले चिन्ह पर दावा किया गया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी दोनों पक्षों की ओर से पार्टी की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
अब दोनों गुट इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे TMC नाम-चिन्ह
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद आगामी उपचुनाव में ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों गुट ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। आयोग ने कहा है कि अंतिम आदेश आने तक दोनों पक्षों को अलग पहचान के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।
दोनों गुटों को देने होंगे तीन-तीन विकल्प
आयोग के निर्देश के मुताबिक, दोनों गुटों को अपने लिए नए नाम के तीन विकल्प और चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित फ्री चुनाव चिन्हों में से तीन विकल्प देने होंगे। दोनों पक्ष चाहें तो नए नाम में मूल पार्टी ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ से अपना जुड़ाव भी दर्शा सकते हैं।
18 सितंबर सुबह 11 बजे तक देना होगा नाम-चिन्ह
दोनों गुटों को अपने नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे तक चुनाव आयोग के सामने पेश करने हैं। इसके बाद उपचुनाव के लिए दोनों पक्षों को अलग-अलग चुनावी पहचान दी जाएगी। यह व्यवस्था फिलहाल आयोग के अंतिम फैसले तक अंतरिम रूप से लागू रहेगी।
6 अक्टूबर को नंदीग्राम-रेजीनगर में मतदान
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है। ऐसे में चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद दोनों गुटों को अब नए नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी करनी होगी।