ग्वालियर। ग्वालियर सहित पूरे जिले में गोवंश में संदिग्ध लंपी वायरस संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। संक्रमण पर नियंत्रण के लिए पशुपालन विभाग की ओर से लगातार टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पा रही है। अब विभाग ने निराश्रित गोवंश के टीकाकरण की रणनीति में बदलाव करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत विभाग की टीमें दिन के साथ-साथ शाम और रात में भी टीकाकरण करेंगी। इसके अलावा गोसेवा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी वैक्सीनेशन का प्रशिक्षण देकर वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निराश्रित गोवंश का टीकाकरण कर सकें। अब तक संभाग में लंपी संक्रमण के चलते 45 गोवंश की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
शाम और रात में होगा अधिक टीकाकरण
विभाग के अनुसार, दिन के समय निराश्रित गोवंश चारे की तलाश में शहर और ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर घूमता रहता है। ऐसे में एक-एक गोवंश को तलाशकर उसका टीकाकरण करना मुश्किल हो जाता है। वहीं, शाम और रात के समय गोवंश अक्सर किसी एक स्थान पर एकत्र होकर विश्राम करता है। ऐसे में टीमें एक ही जगह पर बड़ी संख्या में गोवंश का टीकाकरण कर सकेंगी। अधिकारियों के मुताबिक, वैक्सीन की एक वायल में करीब 100 गोवंश के टीकाकरण की मात्रा होती है। इसलिए एक साथ कई पशुओं को वैक्सीन लगाने से समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही अधिक से अधिक गोवंश को संक्रमण से बचाने में मदद मिल सकती है।
गोसेवकों को भी दिया जाएगा वैक्सीनेशन का प्रशिक्षण
विभाग ने तय किया है कि शहर और जिले में गोसेवा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी टीकाकरण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने क्षेत्र में मिलने वाले निराश्रित गोवंश का टीकाकरण कर सकें। इस पहल से विभाग की टीमों पर निर्भरता कम होगी और उन इलाकों तक भी टीकाकरण पहुंचाया जा सकेगा, जहां निराश्रित गोवंश बड़ी संख्या में मौजूद है।
रतवाई गोशाला में पहुंचीं 11 संक्रमित गायें
बुधवार को रतवाई गोशाला में किसी गाय की मौत की सूचना नहीं मिली, लेकिन नगर निगम की ओर से 11 संक्रमित गायों को गोशाला पहुंचाया गया। यहां उनका उपचार किया जा रहा है। गोशाला में संक्रमित पशुओं को अलग रखकर इलाज और निगरानी की व्यवस्था की जा रही है, ताकि संक्रमण को अन्य गोवंश में फैलने से रोका जा सके।
आयुर्वेदिक दवा से इलाज का गोसेवक ने किया दावा
शहर के गोसेवक संजय गुप्ता ने दावा किया है कि वे लंपी से संक्रमित गायों का आयुर्वेदिक दवाओं के माध्यम से उपचार कर रहे हैं। उनके अनुसार, वे पिछले चार वर्षों से गोसेवा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और रोजाना संक्रमित गायों को यह दवा देते हैं। संजय गुप्ता का दावा है कि इस दवा के इस्तेमाल से कई संक्रमित गायों की हालत में सुधार हुआ है। हालांकि, ऐसे उपचार को लेकर पशु चिकित्सकों की सलाह और वैज्ञानिक पुष्टि को प्राथमिकता देना जरूरी है। संक्रमित पशुओं का उपचार प्रशिक्षित पशु चिकित्सक की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
संक्रमण रोकने के लिए निगरानी जरूरी
लंपी वायरस संक्रमण को देखते हुए विभाग की ओर से टीकाकरण के साथ-साथ संक्रमित और संदिग्ध पशुओं की पहचान पर भी जोर दिया जा रहा है। गोसेवकों और पशुपालकों से अपील की जा सकती है कि वे संक्रमित पशुओं को अलग रखें और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दें। विभाग की नई रणनीति के तहत शाम-रात में टीकाकरण और गोसेवकों की भागीदारी से अधिक संख्या में निराश्रित गोवंश तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।