वॉशिंगटन: रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।
262 सांसदों ने बिल के समर्थन में किया मतदान
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बिल के पक्ष में 262 सांसदों ने वोट किया, जबकि 159 सांसद इसके विरोध में रहे। वोटिंग में रिपब्लिकन सांसदों के साथ डेमोक्रेट पार्टी के कई सांसदों ने भी बिल का समर्थन किया। वहीं, कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया।
किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं
बिल में किसी विशेष देश का नाम लेकर यह नहीं कहा गया है कि उस देश पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। इसके बजाय राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में इसका दायरा रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों तक पहुंच सकता है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में अगर अमेरिका इस प्रावधान का इस्तेमाल करता है, तो भारत भी संभावित तौर पर प्रभावित होने वाले देशों में शामिल हो सकता है। हालांकि, बिल में भारत के खिलाफ सीधे तौर पर कोई 100% टैरिफ तय नहीं किया गया है।
अभी भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं
हाउस से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तत्काल 100% टैरिफ लागू हो गया है। इसके लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। कानून बनने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास यह अधिकार होगा कि वह रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला करें।
रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ेगा दबाव
प्रस्तावित प्रतिबंधों का दायरा केवल रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों तक सीमित नहीं है। इसमें रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ाने के प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रूसी ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े टैंकरों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है।
सीनेट से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट पहले ही भारी बहुमत से मंजूरी दे चुकी है। सीनेट में बिल के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े थे। अब प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बाद इसकी अगली प्रक्रिया राष्ट्रपति की मंजूरी से जुड़ी है।
ईरान पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान
रूस के अलावा इस विधेयक में ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को मजबूत करने के प्रावधान भी शामिल हैं। यानी प्रस्तावित कानून के जरिए अमेरिका रूस और ईरान दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह बिल?
रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों का संभावित असर भारत के ऊर्जा आयात और दोनों देशों के व्यापार पर पड़ सकता है। हालांकि, भारत पर कोई नया अमेरिकी टैरिफ वास्तव में लागू होगा या नहीं, यह आगे अमेरिकी प्रशासन के फैसले और कानून के अंतिम रूप पर निर्भर करेगा।