MP News: परिवहन विभाग यात्री बसों की फिटनेस जांचने के लिए अगले महीने से औचक जांच अभियान चलाएगा। इस दौरान बसों की मौके पर जांच करने के साथ उनके फिटनेस प्रमाणपत्र का भी मिलान किया जाएगा। प्रमाणपत्र मिलने के बाद बस में सुरक्षा मानकों के खिलाफ बदलाव पाए जाने पर संचालक के विरुद्ध कार्रवाई होगी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि संबंधित एजेंसी ने किस आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया था। प्रदेश में करीब 11 हजार यात्री बसें संचालित हैं। इनमें सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायतों और जांच के दौरान सामने आने वाली गड़बड़ियों को देखते हुए विभाग बसों की वास्तविक स्थिति और फिटनेस प्रमाणपत्र, दोनों की पड़ताल करेगा।
इमरजेंसी निकास और दरवाजों की होगी जांच
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की जांच में कई बार ऐसी बसें सामने आती हैं, जिनमें फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के बाद बदलाव कर दिए जाते हैं। इनमें इमरजेंसी निकास की जगह सीट लगाना या दो दरवाजों में से एक को हटाकर वहां अतिरिक्त सीट लगाना जैसी गड़बड़ियां शामिल हैं। हादसे या आग लगने की स्थिति में ऐसे बदलाव यात्रियों के बाहर निकलने में बाधा बन सकते हैं। औचक जांच के दौरान बसों के दरवाजों और आपातकालीन निकास की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
फिटनेस एजेंसी की भूमिका भी आएगी जांच के दायरे में
जांच केवल बस संचालक तक सीमित नहीं रहेगी। गड़बड़ी मिलने पर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने वाली एजेंसी की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। यह देखा जाएगा कि प्रमाणपत्र जारी करते समय बस की स्थिति क्या थी और उसे फिटनेस की मंजूरी किस आधार पर दी गई थी।