बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के दूर-दराज आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के अस्पताल पहुंचने का मामला लगातार चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में प्रभावित क्षेत्रों में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं, बड़ी संख्या में बच्चों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। चार गांवों में किए गए स्वास्थ्य सर्वे के बाद करीब 486 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से कुछ मरीजों का अब भी इलाज जारी बताया जा रहा है। मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
बच्चों की मौत पर उठ रहे कई सवाल
बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौत को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं, साफ पेयजल, पोषण और समय पर इलाज उपलब्ध होने जैसे सवाल उठ रहे हैं। जनहित याचिका में इन सभी मुद्दों को उठाया गया है। हालांकि, अब तक बच्चों की मौत के पीछे किसी एक बीमारी या संक्रमण को जिम्मेदार ठहराने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। अलग-अलग रिपोर्ट्स में खसरा, मलेरिया, श्वसन संबंधी परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का जिक्र किया गया है। ऐसे में मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत स्वास्थ्य जांच और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट रिपोर्ट का इंतजार है।
राहुल गांधी ने सरकार पर उठाए सवाल
बालाघाट मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मध्य प्रदेश सरकार से सवाल किए। उन्होंने दावा किया कि बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच हुई है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में साफ पानी, पोषण और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने सरकार से प्रभावित इलाकों की जमीनी स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। कांग्रेस नेता ने मध्य प्रदेश में मिलावटी दवाओं और अवैध शराब से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, छात्रों, युवाओं, गरीबों, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह इंदौर आ रहे हैं और प्रदेश के छात्रों, युवाओं तथा आम लोगों से फीडबैक ले रहे हैं।
अभिजीत दीपके ने प्रभावित गांवों का दौरा किया
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संयोजक अभिजीत दीपके ने 12 सितंबर को बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों का दौरा किया। उन्होंने अदोरी, कोरका और बोंडारी समेत आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। दीपके ने स्थानीय लोगों से बच्चों की बीमारी, अस्पताल में इलाज और गांवों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्कूल, स्वास्थ्य व्यवस्था और पेयजल की स्थिति का भी जायजा लिया। दौरे के बाद उन्होंने प्रशासन से बच्चों की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं और साफ पानी की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई।
दूषित पानी और कुपोषण को लेकर चिंता
प्रभावित इलाकों में दूषित पेयजल और पोषण की कमी को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता, डॉक्टरों की मौजूदगी, दवाओं की आपूर्ति और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने और अस्पतालों में भर्ती होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में पानी की गुणवत्ता, पोषण स्तर, संक्रमण, मच्छरजनित बीमारियों और बच्चों की पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं की जांच जरूरी होती है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। जनहित याचिका में बच्चों की मौत के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं, दूषित पानी और पोषण से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले से संबंधित दस्तावेज और स्थिति पर जवाब मांगा है। अब सरकार की रिपोर्ट और जांच के आधार पर यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बच्चों की मौत के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार रहे।
जांच और सरकारी कार्रवाई पर नजर
बालाघाट मामले में अब सबसे बड़ा सवाल बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर है। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं, साफ पेयजल, पोषण और आपातकालीन इलाज की व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी मानी जा रही है। फिलहाल मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है, लेकिन मौतों के कारणों और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।