मध्यप्रदेश में नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस वे पर लगी स्ट्रीट लाइटों को अब आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के निर्देशों के तहत प्रदेश के कई शहरों से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर केंद्रीयकृत स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इस नई व्यवस्था के बाद स्ट्रीट लाइटों को रिमोट के जरिए चालू और बंद किया जा सकेगा। साथ ही, किसी लाइट के खराब होने या बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी की जानकारी कंट्रोल रूम तक तुरंत पहुंच जाएगी।
इन शहरों से गुजरने वाले हाइवे होंगे कवर
नया स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, हरदा, खंडवा, रीवा, रतलाम, सागर, उज्जैन और विदिशा जैसे शहरों से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर लागू किया जाएगा। अभी इन लाइटों का संचालन सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर होता है। यदि कोई लाइट खराब हो जाती है, तो इसकी जानकारी अक्सर पेट्रोलिंग वाहन के मौके पर पहुंचने के बाद ही मिलती है। नई तकनीक से यह समस्या दूर करने की तैयारी है।
कंट्रोल रूम में दिखेगी हर स्ट्रीट लाइट की स्थिति
स्मार्ट सिस्टम के तहत प्रत्येक स्ट्रीट लाइट को केंद्रीय नियंत्रण एवं निगरानी प्रणाली यानी CCMS से जोड़ा जाएगा। जैसे ही कोई लाइट बंद होगी या उसमें तकनीकी खराबी आएगी, उसकी जानकारी कंट्रोल रूम के पैनल पर दिखाई देने लगेगी। सीसीएमएस के वेब आधारित केंद्रीय सर्वर पर सभी हाइवे कॉरिडोर की स्ट्रीट लाइटों का डेटा सुरक्षित रखा जाएगा। नक्शे पर हर लाइट की लोकेशन और उसकी स्थिति देखी जा सकेगी। प्रत्येक कॉरिडोर की स्ट्रीट लाइटों को अलग-अलग कंट्रोल बॉक्स से जोड़ा जाएगा। यही कंट्रोल बॉक्स खराबी की जानकारी संबंधित लोकेशन के साथ कंट्रोल रूम तक भेजेगा। इससे मैप पर यह भी पता चल सकेगा कि किस स्थान की लाइट बंद है।
5G नेटवर्क से भेजी जाएगी जानकारी
स्ट्रीट लाइटों की स्थिति और खराबी से जुड़ा डेटा तेजी से भेजने के लिए 5G नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कंट्रोल रूम को लाइटों की स्थिति की जानकारी जल्द मिल सकेगी और खराबी दूर करने की प्रक्रिया तेज होगी। इस परियोजना के लिए NHAI के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चयनित एजेंसी को सिस्टम तैयार करने के साथ-साथ अगले पांच वर्षों तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।
बिजली की खपत पर भी रखी जाएगी नजर
स्मार्ट सिस्टम केवल लाइटों को चालू-बंद करने तक सीमित नहीं रहेगा। प्रत्येक CCMS फीडर पैनल में थ्री-फेज ऊर्जा मीटर लगाया जाएगा। इससे कई तरह के आंकड़े रिकॉर्ड किए जा सकेंगे, जिनमें शामिल हैं—
- वोल्टेज की स्थिति
- करंट की जानकारी
- पावर फैक्टर
- बिजली की कुल खपत
- स्ट्रीट लाइटों के संचालन का डेटा
- विद्युत आपूर्ति बाधित होने की जानकारी
- फीडर ट्रिप होने की स्थिति
- अन्य तकनीकी गड़बड़ियां
- इससे बिजली की खपत पर निगरानी रखी जा सकेगी और तकनीकी समस्याओं की पहचान भी आसानी से हो सकेगी।
नेटवर्क फेल होने पर भी चलती रहेंगी लाइटें
सिस्टम में ऐसी व्यवस्था भी की जाएगी कि नेटवर्क फेल होने या तकनीकी समस्या आने पर स्ट्रीट लाइटों का संचालन पूरी तरह बंद न हो। इसके लिए CCMS में स्वतंत्र हार्डवेयर टाइमर का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा बिजली गुल होने की स्थिति में रियल टाइम क्लॉक और इवेंट लॉग का बैकअप भी उपलब्ध रहेगा। इससे सिस्टम दोबारा शुरू होने पर पिछली घटनाओं और संचालन से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रहेगी।
साइबर सिक्योरिटी पर भी रहेगा जोर
स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम में साइबर सिक्योरिटी फीचर्स भी शामिल किए जाएंगे। इसमें हेकिंग डिटेक्शन, सेल्फ-हीलिंग मैकेनिज्म और फेल-सेफ ऑपरेशन जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। सिस्टम को NHAI के मुख्यालय स्थित केंद्रीय सर्वर से सुरक्षित माध्यम के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे केंद्रीय स्तर पर निगरानी, रिपोर्टिंग और डेटा मैनेजमेंट किया जा सकेगा। यदि स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम में खराबी आती है या संचार व्यवस्था बाधित होती है, तो संबंधित एजेंसी को अधिकतम 48 घंटे के भीतर सिस्टम बहाल करना होगा।
रियल टाइम निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही
NHAI भोपाल के जनरल मैनेजर अजय कुमार स्वामी के अनुसार, प्रदेश के हाइवे और एक्सप्रेस वे की स्ट्रीट लाइटों को CCMS से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसके लिए टेंडर जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सिस्टम लागू होने के बाद प्रत्येक स्ट्रीट लाइट की रियल टाइम निगरानी संभव होगी। इससे खराब लाइटों की जानकारी समय पर मिलेगी और उनके रखरखाव की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।