लखनऊ, 18 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने यूपीआई की नई शुल्क व्यवस्था और उत्तर प्रदेश में स्मार्ट स्कूल विकसित करने की योजना पर प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा बयान में उन्होंने यूपीआई के चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर शुल्क लगाने का विरोध किया। वहीं, स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा का स्वागत करते हुए इसके लिए निर्धारित धनराशि और बुनियादी सुविधाओं की प्राथमिकता पर सवाल उठाए।
यूपीआई शुल्क से जनता का खर्च बढ़ने की आशंका जताई
मायावती ने कहा कि पहले डिजिटल भुगतान को व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया गया और अब उसी व्यवस्था के कुछ लेनदेन पर शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने इसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम बताया और कहा कि इसे लेकर जनता में बेचैनी तथा नाराजगी स्वाभाविक है। बसपा प्रमुख ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे चाहे जिस नाम से बताया जाए, अंततः आम जनता का खर्च बढ़ेगा। उन्होंने सरकार से लोगों की आर्थिक कठिनाइयों को ध्यान में रखने और नीतियों में जनकल्याण को प्राथमिकता देने की मांग की। गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों की परेशानियां कम करने पर ध्यान देना चाहिए।
नई यूपीआई व्यवस्था क्या है, किस पर लगेगा शुल्क?
वित्तीय सेवा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध एनपीसीआई के आधिकारिक प्रश्नोत्तर के अनुसार, नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगेगा। सामान्य दर के तहत प्रति लेनदेन इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। कुछ व्यापारी श्रेणियों के लिए अलग दरें और छूट निर्धारित हैं। आधिकारिक दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान नि:शुल्क रहेगा और व्यापारी एमडीआर को ग्राहकों से अलग शुल्क के रूप में नहीं वसूल सकेंगे। दो व्यक्तियों के बीच पैसे भेजने और ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर भी यह शुल्क नहीं लगेगा। इसलिए मायावती की खर्च बढ़ने की आशंका को प्रत्येक यूपीआई भुगतान पर ग्राहक से शुल्क लिए जाने की घोषणा नहीं समझा जाना चाहिए।
स्मार्ट स्कूलों से पहले बुनियादी सुविधाएं पूरी करने की मांग
शिक्षा के मुद्दे पर मायावती ने उत्तर प्रदेश में करीब 14,500 स्कूलों को स्मार्ट बनाने की घोषणा को सकारात्मक बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि डिजिटल पढ़ाई से पहले बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी होनी चाहिए। उन्होंने स्कूल भवन, बैठने के लिए बेंच-कुर्सियां, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई की उचित व्यवस्था पर जोर दिया। मायावती ने करीब ₹300 करोड़ की योजना का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि प्रति स्कूल लगभग ₹2 लाख में इन जरूरतों को किस हद तक पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने सरकार से इस पहलू पर भी विचार करने की मांग की।
14,429 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के लिए मंजूर हुए हैं ₹300 करोड़
योजना संबंधी प्रकाशित विवरण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए ₹300 करोड़ मंजूर किए हैं। प्रति विद्यालय ₹2,07,910 की प्रस्तावित दर तय की गई है, जिसमें संबंधित शुल्क और जीएसटी शामिल हैं। काम के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। स्मार्ट क्लास की स्थापना प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से होगी। निविदा में प्रस्तावित दर से कम लागत मिलने पर निर्धारित बजट के भीतर अधिक विद्यालयों को शामिल किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में तकनीक आधारित शिक्षा का विस्तार करना है। यहां दोनों मुद्दों का अंतर महत्वपूर्ण है: योजना विवरण में निर्धारित राशि स्मार्ट क्लास की स्थापना के लिए है, जबकि मायावती ने इसके साथ स्कूलों की व्यापक बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देने का सवाल उठाया है।