मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। 18 सितंबर को मादा चीता केजीपी12 ने चार शावकों को जन्म दिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा कि चार साल, चार नए जीवन। भारत में चीता प्रोजेक्ट को चार साल पूरे होने के मौके पर यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो गई है। नए शावकों के आने से कूनो में चीतों का परिवार बढ़ रहा है। यह घटना चीता संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा रही है। पार्क अधिकारियों और प्रोजेक्ट से जुड़े सभी लोगों ने इसकी खुशी जाहिर की है।
भारत में जन्मी मादा चीता का पहला प्रसव
केजीपी12 ने पहली बार शावकों को जन्म दिया है जो बेहद खास माना जा रहा है। अब तक नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीतों ने ही शावकों को जन्म दिया था। लेकिन अब भारत में जन्मी मादा चीता का भी सफल प्रसव हो गया है। इसे भारत में चीतों के प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। चीते कूनो के माहौल में काफी हद तक ढल चुके हैं और बड़ी संख्या में खुले बाड़े में घूम रहे हैं। इसी अनुकूलन का नतीजा है कि भारतीय मूल की मादा चीता ने सफलतापूर्वक शावकों को जन्म दिया। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कूनो टीम को बधाई दी है।
चीता प्रोजेक्ट को पूरे हुए चार साल
गुरुवार को ही भारत में चीता प्रोजेक्ट को चार साल पूरे हो गए। इन चार वर्षों में प्रोजेक्ट में कई उतार-चढ़ाव आए। शुरुआत में कई चुनौतियां थीं लेकिन अब यह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। कूनो नेशनल पार्क के अधिकारी प्रोजेक्ट को और तेज गति देने की योजना बना रहे हैं। चार साल पूरे होने के मौके पर चार नए शावकों का जन्म संयोग से भी ज्यादा मायने रखता है। यह उपलब्धि प्रोजेक्ट की सफलता की दिशा में विश्वास बढ़ाने वाली है। संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि अब चीतों का प्राकृतिक प्रजनन बढ़ने से प्रोजेक्ट को नई मजबूती मिलेगी।
कूनो में चीतों की वर्तमान संख्या
कूनो नेशनल पार्क में इस समय चीतों की कुल संख्या 56 हो गई है। विदेश से 26 चीते भारत लाए गए थे। वर्तमान में 32 चीते ऐसे हैं जिनका जन्म भारत में हुआ है जबकि 9 विदेशी मूल के चीते भी यहां मौजूद हैं। इस दौरान 25 चीतों की मौत भी हो चुकी है। प्रोजेक्ट चीता की संख्या अगले साल तक 89 करने का लक्ष्य रखा गया है। नए शावकों के आने से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या प्रोजेक्ट की सफलता का प्रमाण है।
प्रोजेक्ट चीता की आगे की राह
कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट चार साल पहले शुरू हुआ था। शुरुआती परेशानियों के बावजूद अब यह स्थिर होता दिख रहा है। भारतीय मूल की मादा चीता द्वारा शावकों को जन्म देना प्राकृतिक अनुकूलन की दिशा में बड़ा कदम है। अधिकारी खुले बाड़े में चीतों की निगरानी और संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। नए शावकों की देखभाल और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट चीता के सफल होने से भारत में विलुप्त हो चुके इस जीव को वापस बसाने का सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चार नए शावक इस सफर की नई उम्मीद बनकर आए हैं।