राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने धर्म को लेकर बड़ा बयान दिया है। उज्जैन में आयोजित धर्म संसद कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे भागवत ने कहा कि आज युवा जब धर्म की बात करते हैं, तो कई बार इसे बुढ़ापे की सोच से जोड़ दिया जाता है। जबकि धर्म जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग है।
धर्म को लेकर क्या बोले मोहन भागवत?
मोहन भागवत ने कहा कि धर्म को केवल उम्र या किसी खास वर्ग से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। धर्म जीवन को सही दिशा देने का काम करता है और मनुष्य के आचरण व सोच को बेहतर बनाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोग धर्म के वास्तविक अर्थ को समझना भूलते जा रहे हैं। धर्म का संबंध केवल धार्मिक गतिविधियों से नहीं, बल्कि जीवन जीने के सही तरीके से भी है।
‘धर्म सभी सुखों का आधार’
RSS प्रमुख ने कहा कि धर्म सभी सुखों का आधार है। उनके मुताबिक, मनुष्य को जीवन में स्थायी सुख और संतुलन के लिए धर्म के वास्तविक अर्थ को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य का यह अहंकार कि उसकी सत्ता हमेशा बनी रहेगी, एक गलतफहमी है। समय और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, इसलिए व्यक्ति को अहंकार से दूर रहकर धर्म और सही आचरण के मार्ग पर चलना चाहिए।
उज्जैन में धर्म संसद कार्यक्रम
मोहन भागवत उज्जैन में आयोजित धर्म संसद कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने धर्म, जीवन मूल्यों और मनुष्य के अहंकार से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। उनके बयान में युवाओं की भूमिका और धर्म की प्रासंगिकता पर भी जोर रहा। उन्होंने संकेत दिया कि धर्म को पुरानी सोच मानने के बजाय जीवन को दिशा देने वाले सिद्धांत के रूप में समझना चाहिए।
युवाओं के लिए धर्म का क्या संदेश?
भागवत के बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि धर्म केवल बुजुर्गों या किसी विशेष आयु वर्ग तक सीमित विषय नहीं है। युवाओं के जीवन में भी धर्म का महत्व है, क्योंकि यह उन्हें सही निर्णय लेने, अनुशासन बनाए रखने और जीवन मूल्यों को समझने में मदद कर सकता है। उन्होंने धर्म के वास्तविक अर्थ को समझने और उसे जीवन व्यवहार में उतारने पर जोर दिया।