भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में फर्जी दस्तावेजों, नकली GST नंबर और जाली रसीदों के जरिए MSME लोन पास कराने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) भोपाल ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा के शाखा प्रबंधक समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि एक युवा कारोबारी की जानकारी के बिना उसके नाम पर 10 लाख रुपये का MSME लोन कराया गया। लोन की रकम मशीन खरीदने के नाम पर जारी हुई, लेकिन कारोबारी को न मशीन मिली और न ही लोन की राशि। जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2024 में इसी तरह कई अन्य लोन भी पास कराए गए थे।
बैंक मैनेजर समेत पांच लोगों पर केस
EOW भोपाल ने 17 सितंबर 2026 को इस मामले में अपराध क्रमांक 99/2026 दर्ज किया है। आरोपियों में शामिल हैं—
- राहुल भोसले – शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एमपी नगर शाखा
- राजीव राजपूत – फाइनेंशियल एडवाइजर
- नईमा अली – प्रोप्राइटर, विशाल इंटरप्राइजेस
- कमर अली – संचालक, विशाल इंटरप्राइजेस
- उमर अली – प्रोप्राइटर, ग्लोबल मार्केटर्स
इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।
3 से 4 घंटे में पास करा दिया गया लोन
EOW की जांच के अनुसार, शिकायतकर्ता के नाम पर 21 मार्च 2024 को 10 लाख रुपये का MSME लोन पास किया गया। आवेदन से लेकर लोन की राशि जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया केवल 3 से 4 घंटे में एक ही बैठक के दौरान पूरी कर दी गई। बताया गया कि शिकायतकर्ता के मामा ने पहले ही लोन से जुड़े कागजात बैंक में जमा कर दिए थे। इसके बाद शिकायतकर्ता को बैंक शाखा में बुलाकर शाखा प्रबंधक के सामने पहले से तैयार दस्तावेजों पर केवल हस्ताक्षर कराए गए।
जांच में आरोप है कि बैंक की ओर से—
- कारोबारी के व्यवसाय स्थल का निरीक्षण नहीं किया गया
- मशीन सप्लाई करने वाली फर्म का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ
- विक्रेता फर्म से शिकायतकर्ता की मुलाकात नहीं कराई गई
- लोन दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई
मार्जिन मनी की फर्जी रसीदें लगाईं
लोन प्रक्रिया में मार्जिन मनी दिखाने के लिए 4 लाख रुपये और 1.15 लाख रुपये की दो रसीदें लगाई गई थीं। इन रसीदों में विशाल इंटरप्राइजेस को भुगतान किया जाना दिखाया गया था। हालांकि, EOW की जांच में कथित तौर पर पाया गया कि यह भुगतान वास्तव में हुआ ही नहीं था। फर्म के बैंक खाते में यह रकम जमा नहीं हुई और शिकायतकर्ता या उसके परिवार के खातों में भी इतनी राशि उपलब्ध नहीं थी। आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने इन रसीदों का सत्यापन किए बिना ही उन्हें स्वीकार कर लिया।
फर्जी GST नंबर से फर्म का सत्यापन
जांच में यह भी सामने आया कि मशीन सप्लाई करने वाली विशाल इंटरप्राइजेस का बैंक में दर्ज पता कथित तौर पर फर्जी था। फर्म के दस्तावेजों में इस्तेमाल किया गया GST नंबर भी किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज पाया गया। EOW के अनुसार, बैंक के अपने GST पोर्टल पर फर्म के मालिक का नाम अलग दिखाई दे रहा था। इसके बावजूद लोन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। फर्म का सत्यापन केवल कोटेशन पर दर्ज मोबाइल नंबर पर फोन करके किए जाने का आरोप है।
मशीन के बजाय रकम दूसरे खातों में भेजी गई
लोन की 8 लाख 85 हजार रुपये की राशि मशीन खरीदने के नाम पर विशाल इंटरप्राइजेस के खाते में भेजी गई थी। लेकिन शिकायतकर्ता को मशीन नहीं मिली। जांच में आरोप है कि फर्म के संचालकों ने यह पैसा अपनी दूसरी फर्म ग्लोबल मार्केटर्स के जरिए शिकायतकर्ता की मां के खाते में भेजा। इसके बाद रकम शिकायतकर्ता के मामा और उसके बताए लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
जांच के अनुसार—
- 18 मार्च 2024 को 3.91 लाख रुपये
- 22 मार्च 2024 को 3 लाख रुपये
इसी तरह ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा लोन के दिन फाइनेंशियल एडवाइजर राजीव राजपूत को 50 हजार रुपये और शिकायतकर्ता के मामा को 2 लाख 46 हजार 500 रुपये भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। EOW के मुताबिक, फर्म के एक संचालक ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि मशीन देने के बजाय पैसा भेजा गया था और इस सौदे में उसे 40 हजार रुपये मिले।
मशीन के बिना बीमा और CERSAI पंजीयन
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि मशीन की वास्तविक आपूर्ति हुए बिना ही बैंक ने उसका बीमा करा दिया और CERSAI में उसका पंजीयन भी कर दिया। बीमे की राशि शिकायतकर्ता के खाते से काट ली गई। लोन की किश्तें शिकायतकर्ता के मामा और उसके परिचितों द्वारा भरी जाती रहीं। इस दौरान शिकायतकर्ता को बताया जाता रहा कि लोन बंद कराने की प्रक्रिया चल रही है। मामा की मृत्यु के बाद जुलाई 2024 में जब बैंक की ओर से किश्त जमा करने के लिए फोन आया, तब शिकायतकर्ता को पूरे मामले की जानकारी हुई। इसके बाद विक्रेता फर्म ने मशीन देने से संबंधित पावतियों की फोटोकॉपी बैंक में जमा कराई। आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने मूल दस्तावेज देखे बिना और शिकायतकर्ता से पुष्टि किए बिना इन पावतियों को सही मान लिया।
मार्च 2024 में कई और लोन का खुलासा
EOW की जांच में यह मामला अकेला नहीं पाया गया। आरोप है कि मार्च 2024 में शिकायतकर्ता के मामा ने इसी बैंक शाखा से 10 से 15 दिन के भीतर पांच लोन पास कराए। इनमें एक मामले को छोड़कर अन्य लोगों को मशीन नहीं मिली। जांच के दौरान तीन और पीड़ितों के मामले सामने आए हैं।
प्रिंटिंग प्रेस संचालक का मामला
एक प्रिंटिंग प्रेस संचालक को 9.90 लाख रुपये का लोन और 4 लाख रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट दिलाई गई। काफी दबाव के बाद उसे मशीन मिली, लेकिन नकली बिल के आधार पर 1,88,988 रुपये GST के नाम पर काटे गए। इसके अलावा बीमे की राशि दो बार वसूलने का भी आरोप है।
महिला को मिला 7 लाख का लोन
स्वर्ण आभूषण का काम करने वाली एक महिला के नाम पर 14 मार्च 2024 को 7 लाख रुपये का लोन पास कराया गया। आरोप है कि महिला को मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई।
होम लोन के लिए पहुंचे युवक के नाम पर MSME लोन
एक अन्य युवक होम लोन लेने के लिए बैंक पहुंचा था। आरोप है कि उससे मार्जिन मनी के नाम पर 2 लाख 40 हजार रुपये नकद लिए गए और उसकी इच्छा के बिना MSME लोन करा दिया गया। इसके बदले उसे कोई मशीन नहीं मिली। बताया गया कि ये सभी लोन बाद में NPA हो गए।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप
EOW की जांच में आरोप है कि इन मामलों की जानकारी होने के बावजूद शाखा प्रबंधक ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना नहीं दी और न ही कोई कार्रवाई शुरू की। इसके उलट, पीड़ितों पर लोन चुकाने का दबाव बनाया गया। फिलहाल EOW ने बैंक मैनेजर, फाइनेंशियल एडवाइजर और सप्लायर फर्मों से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसी लोन दस्तावेजों, बैंक खातों, GST रिकॉर्ड, फर्मों के पते और रकम के लेन-देन की जांच कर रही है।