व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को के ऐतिहासिक रेड स्क्वायर में आयोजित विजय दिवस परेड में शामिल होकर सैनिकों और नागरिकों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने विजय दिवस को रूस का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व बताया। पुतिन ने कहा कि महान देशभक्ति युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों की वीरता और बलिदान रूस की राष्ट्रीय चेतना का स्थायी हिस्सा हैं और देश हमेशा उनके योगदान का सम्मान करता रहेगा।
सैनिकों की विरासत को बताया राष्ट्र की सबसे बड़ी धरोहर
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध में विजय दिलाने वाले सैनिकों की विरासत और उनके आदेशों का सम्मान करना हर रूसी नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि रूस महान देशभक्ति युद्ध के इतिहास, उसके वास्तविक नायकों और उस दौर के संघर्षों की स्मृति को पूरी श्रद्धा से संजोकर रखेगा। पुतिन ने युद्ध के दौरान मोर्चे पर लड़ने वाले सैनिकों के साथ-साथ जन मिलिशिया, श्रमिकों और देश के लिए काम करने वाले हर नागरिक के योगदान को याद किया।
राष्ट्रीय एकता और मनोबल पर दिया विशेष जोर
अपने संबोधन में पुतिन ने कहा कि किसी भी देश की वास्तविक शक्ति केवल हथियारों या तकनीक में नहीं, बल्कि उसके लोगों की एकता और मनोबल में होती है। उन्होंने कहा कि सैनिक, किसान, कारखाना कर्मी, डॉक्टर, शिक्षक, युद्ध संवाददाता और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग सभी मिलकर राष्ट्र की शक्ति बनते हैं। पुतिन ने जोर देकर कहा कि कठिन समय में रूस की जनता हमेशा एक दीवार की तरह खड़ी रही है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
विजय दिवस भाषण को माना जा रहा रणनीतिक संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विजय दिवस पर पुतिन का यह भाषण केवल ऐतिहासिक स्मरण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भविष्य की रणनीतिक दिशा के संकेत भी दिखाई दिए। अपने संबोधन के जरिए उन्होंने रूसी जनता और सेना का मनोबल मजबूत करने का प्रयास किया। पश्चिमी देशों के साथ जारी तनाव और वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह भाषण रूस की आंतरिक एकजुटता को प्रदर्शित करने वाला माना जा रहा है।
देशभक्ति को बताया रूस की स्थायी शक्ति
पुतिन ने कहा कि सोवियत संघ की जनता ने अपने पराक्रम से यह साबित किया था कि मातृभूमि के प्रति निष्ठा करोड़ों लोगों को एकजुट कर सकती है। उन्होंने कहा कि रूस की सफलता की असली कुंजी उसकी नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति, वीरता, शौर्य और हर चुनौती का सामना करने की क्षमता में छिपी हुई है। उनके भाषण में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का स्वर प्रमुख रूप से दिखाई दिया।