सूर्य की सतह पर इस समय रीजन 4366 नाम का एक विशालकाय और अत्यधिक अस्थिर चुंबकीय क्षेत्र सक्रिय है, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। यह सनस्पॉट आकार में तेजी से बढ़ते हुए इतना विशाल हो चुका है कि इसका फैलाव 1859 के कैरिंगटन इवेंट जैसे ऐतिहासिक सौर तूफान के आधे के बराबर पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सनस्पॉट पृथ्वी की सीधी दिशा में स्थित है, जिससे यहां तक पहुंचने वाले सौर विकिरण और चुंबकीय तूफानों की तीव्रता और भी बढ़ सकती है।
X8.1 श्रेणी का शक्तिशाली विस्फोट और वैश्विक असर
1 फरवरी 2026 को इसी क्षेत्र ने X8.1 श्रेणी की अत्यंत शक्तिशाली सौर ज्वाला उत्पन्न की, जिसने पिछले दो वर्षों में दर्ज हुए सबसे बड़े विस्फोट का रिकॉर्ड कायम किया। X-क्लास ज्वालाएं सूर्य की सबसे ताकतवर ऊर्जा घटनाएं मानी जाती हैं और इनके कारण दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में रेडियो ब्लैकआउट तक दर्ज किया गया। यह ज्वाला सूर्य से निकलकर धरती की ओर बढ़ी, जिसके साथ आने वाली उच्च-ऊर्जा किरणें और विकिरण पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
कोरोनल मास इजेक्शन का खतरा और धरती पर प्रभाव
इस विस्फोट के साथ सूर्य से प्लाज्मा का विशाल बादल यानी कोरोनल मास इजेक्शन भी अंतरिक्ष में उभरा है, जिसका रुख सीधा धरती की ओर है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सौर तूफान 5 फरवरी की देर रात या 6 फरवरी 2026 को पृथ्वी के मैग्नेटोस्फियर से टकरा सकता है। इसके प्रभाव से जीपीएस सेवाओं, सैटेलाइट संचार, रेडियो नेटवर्क और बिजली ग्रिड तक में अस्थायी बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विमानन संचार और समुद्री नेविगेशन भी कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
भारत में दिख सकती हैं रंगीन नॉर्दर्न लाइट्स की दुर्लभ झलक
इस सौर तूफान का एक आकर्षक और सकारात्मक प्रभाव यह भी हो सकता है कि धरती के आसमान में नॉर्दर्न लाइट्स बेहद दक्षिण की दिशा तक फैल सकती हैं। सामान्यतः आर्कटिक क्षेत्रों में दिखाई देने वाली ये ऑरोरा लाइट्स सौर तूफान के कारण मध्य अक्षांशों तक पहुंच सकती हैं। विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि लद्दाख, कश्मीर और हिमालय की ऊंची चोटियों पर लोग लाल, गुलाबी और हरी रोशनियों से जगमगाता आसमान देख सकते हैं। यदि चुंबकीय तूफान की तीव्रता और बढ़ती है, तो भारत के उत्तरी हिस्सों के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी यह दुर्लभ दृश्य संभव हो सकता है।
सोलर मैक्सिमम का दौर और आने वाले महीनों का खतरा
नासा ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि सूर्य अपने 11 वर्षीय सोलर चक्र के सबसे सक्रिय चरण, जिसे सोलर मैक्सिमम कहा जाता है, से गुजर रहा है। यह चरण 2026 तक जारी रह सकता है, जिसके दौरान सूर्य पर सनस्पॉट, सौर ज्वालाएं और चुंबकीय गतिविधियां अत्यधिक बढ़ जाती हैं। इसका मतलब यह है कि आने वाले महीनों में पृथ्वी को और भी शक्तिशाली सौर तूफानों का सामना करना पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरिक्ष एजेंसियों, सैटेलाइट कंपनियों और संचार नेटवर्क को इस अवधि में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
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