कोलकाता: दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार की शुरुआत धनतेरस के साथ होती है। यह पर्व सिर्फ सोना-चांदी या नए बर्तन खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली का प्रतीक भी माना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन विधि-विधान से पूजा करने और शुभ चीजों की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं धनतेरस क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे की पौराणिक मान्यता क्या है और इस दिन किन परंपराओं का पालन किया जाता है।
क्यों मनाया जाता है धनतेरस?
धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन उनकी पूजा करने की परंपरा है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, क्योंकि यह कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।
मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का महत्व
धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है, जबकि भगवान कुबेर धन के रक्षक माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में आर्थिक खुशहाली और सुख-शांति बनी रहती है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की भी परंपरा है।
धनतेरस पर क्यों खरीदे जाते हैं सोना-चांदी और बर्तन?
धनतेरस के दिन खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, नए बर्तन, आभूषण और अन्य घरेलू सामान खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई नई वस्तुएं घर में सुख और समृद्धि लेकर आती हैं। हालांकि, खरीदारी का मतलब सिर्फ महंगी चीजें लेना नहीं है, बल्कि लोग अपनी क्षमता के अनुसार छोटी-छोटी चीजें भी खरीदकर इस पर्व को मनाते हैं।
धनतेरस पर दीपदान की भी है खास परंपरा
धनतेरस के दिन दीपदान का विशेष महत्व है। इस दिन शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही घर के आंगन और मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर खुशहाली की कामना की जाती है।
धनतेरस से शुरू होती है दिवाली की रौनक
धनतेरस के साथ ही दिवाली की तैयारियां तेज हो जाती हैं। बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और लोग घरों की साफ-सफाई, सजावट और खरीदारी में जुट जाते हैं। मिठाइयों की दुकानों से लेकर बर्तन और आभूषणों के बाजार तक हर जगह त्योहार का उत्साह देखने को मिलता है। धनतेरस हमें यह संदेश भी देता है कि जीवन में धन के साथ-साथ स्वास्थ्य, परिवार की खुशहाली और आपसी प्रेम भी बेहद जरूरी है।