कोलकाता: चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मां के गर्भधारण से लेकर शिशु के जन्म के बाद के शुरुआती दो साल यानी कुल 'पहले 1000 दिन' बच्चे के भविष्य के स्वास्थ्य और समग्र विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय के दौरान शिशु का मस्तिष्क, पाचन तंत्र, रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) और शारीरिक संरचना बेहद तेजी से विकसित होती है। यही कारण है कि बाल रोग विशेषज्ञ इस शुरुआती अवधि में बच्चों के सही खान-पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
गट माइक्रोबायोटा और इम्युनिटी के विकास का आधार
विशेषज्ञों के मुताबिक, जन्म के बाद शुरुआती 1000 दिनों के भीतर बच्चे के पेट में 'गट माइक्रोबायोटा' यानी लाभदायक सूक्ष्मजीवों का वातावरण तैयार होता है। यह प्रणाली बच्चे की पाचन शक्ति और इम्युनिटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। इसके साथ ही, शरीर भोजन से ऊर्जा का उपयोग कैसे करेगा और रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर कैसे नियंत्रित रहेगा, ये सभी जैविक प्रक्रियाएं इसी उम्र में आकार लेती हैं। इस दौरान बच्चा अलग-अलग स्वादों से परिचित होता है, जो भविष्य में उसकी भोजन संबंधी आदतों को तय करता है।
अतिरिक्त चीनी और प्रोसेस्ड फूड से बढ़ा वजन और मेटाबॉलिक खतरा
विभिन्न अध्ययनों में यह चेतावनी दी गई है कि शुरुआती उम्र से ही बच्चों को अतिरिक्त चीनी (Added Sugar) युक्त आहार देने से भविष्य में उनमें मोटापे (Obesity) का खतरा काफी बढ़ जाता है। नियमित रूप से चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ (Ultra-Processed Food) खिलाने से बच्चों में आगे चलकर चयापचय (Metabolic) से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही, बचपन में प्रोसेस्ड फूड की आदत पड़ने से बड़े होने पर भी अस्वास्थ्यकर भोजन चुनने की प्रवृत्ति बनी रहती है।
प्राकृतिक मिठास बनाम अतिरिक्त चीनी: क्या है अंतर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि फलों में स्वाभाविक रूप से पाई जाने वाली मिठास और खान-पान में ऊपर से मिलाई जाने वाली चीनी (Added Sugar) में बड़ा अंतर है। शोध में मुख्य रूप से कृत्रिम या ऊपर से मिलाई गई चीनी को लेकर सतर्क किया गया है, इसलिए ताजे फलों जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को नुकसानदेह नहीं मानना चाहिए। हालांकि किसी विशेष अवसर पर थोड़ा अलग भोजन देने से बच्चे के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक बुरा असर नहीं पड़ता, लेकिन दैनिक आहार की गुणवत्ता ही सबसे अधिक मायने रखती है।
अभिभावकों के लिए संतुलित आहार की सलाह
डॉक्टरों की सलाह है कि अभिभावकों को बच्चे की उम्र और शारीरिक आवश्यकता के अनुसार संतुलित तथा पौष्टिक आहार देना चाहिए। अतिरिक्त मीठे पेय पदार्थ और पैक्ड फूड देने से बचना चाहिए। हालांकि, बच्चे के खाने को लेकर किसी भी तरह के बेवजह डर या घबराहट में आने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक नियमित और स्वस्थ आहार दिनचर्या का पालन करना चाहिए। बच्चे के व्यक्तिगत स्वास्थ्य और आहार तालिका (Diet Plan) के लिए हमेशा बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श लेना ही सुरक्षित होता है।