एक समय था जब जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब यह समस्या युवाओं में भी तेजी से दिखाई देने लगी है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार निष्क्रिय जीवनशैली मांसपेशियों को कमजोर करती है, जिससे शरीर में जकड़न और दर्द की समस्या बढ़ने लगती है। कई लोग तुरंत राहत के लिए पेनकिलर का सहारा लेते हैं, लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान होता है।
शरीर में सूजन बनती है दर्द की बड़ी वजह
मसल्स और जोड़ों के दर्द के पीछे अक्सर शरीर में बढ़ती सूजन जिम्मेदार होती है। जब शरीर में सूजन लंबे समय तक बनी रहती है तो मांसपेशियों में खिंचाव, थकान और जोड़ों में जकड़न महसूस होने लगती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो धीरे-धीरे चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए विशेषज्ञ दर्द की जड़ यानी सूजन को नियंत्रित करने पर जोर देते हैं।
पोषण की कमी से बढ़ सकती है परेशानी
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स नहीं मिलने पर रिकवरी प्रक्रिया धीमी हो जाती है। बार-बार थकान महसूस होना, कमजोरी, शरीर टूटना और लगातार दर्द बने रहना कई बार पोषण की कमी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल दवा लेने के बजाय खानपान और पोषक तत्वों पर विशेष ध्यान देना जरूरी माना जाता है।
करक्यूमिन सूजन कम करने में मददगार
हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्व माना जाता है। यह शरीर में सूजन कम करने और दर्द से राहत देने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञ इसे दूध या भोजन के साथ नियमित रूप से लेने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों में हल्दी के गुणों को मांसपेशियों और जोड़ों के लिए लाभकारी माना गया है।
बोस्वेलिया से मिल सकती है राहत
बोस्वेलिया एक हर्बल तत्व है, जिसे पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है। माना जाता है कि यह जोड़ों की जकड़न कम करने और मांसपेशियों की रिकवरी बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित और संतुलित उपयोग से यह शरीर की गतिशीलता सुधारने में मदद कर सकता है।
विटामिन डी हड्डियों के लिए बेहद जरूरी
विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के सही उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी कमी होने पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और शरीर में दर्द बढ़ सकता है। धूप, दूध, अंडे और कुछ खाद्य पदार्थ विटामिन डी के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। विशेषज्ञ जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सप्लीमेंट लेने की भी सलाह देते हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड से मिल सकता है आराम
ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर में सूजन कम करने और जोड़ों को स्वस्थ रखने में मददगार माना जाता है। यह मछली, अलसी के बीज और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित मात्रा में ओमेगा-3 लेने से शरीर की रिकवरी और मांसपेशियों की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है।
केवल दवा नहीं, जीवनशैली बदलना भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सप्लीमेंट लेने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। नियमित व्यायाम, हल्की स्ट्रेचिंग और सक्रिय जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है। रोजाना थोड़ी शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और शरीर की लचीलापन बनाए रखने में मदद करती है। साथ ही वजन नियंत्रित रखना भी जोड़ों पर दबाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना न लें सप्लीमेंट
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि किसी भी सप्लीमेंट या दवा का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरत अलग होती है और गलत मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही पोषण के जरिए मसल्स और जोड़ों के दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और बेहतर जीवनशैली अपनाई जा सकती है।