जबलपुर। मध्य प्रदेश में बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने एक बार फिर अपनी ही सरकार पर सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा है। जबलपुर में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर उन्होंने X पर पोस्ट साझा कर योजना की जानकारी जनप्रतिनिधियों को नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। विश्नोई ने कहा कि उनकी विधानसभा के मझौली विकासखंड को भी कॉरिडोर में शामिल किया गया है, लेकिन उन्हें अब तक यह जानकारी नहीं है कि क्षेत्र में कौन-से उद्योग आएंगे और योजना जमीन पर कब उतरेगी।
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर अजय विश्नोई का तंज
अजय विश्नोई ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जबलपुर में पहली इन्वेस्टर मीट होने के समय से ही उन्हें शहर में उद्योग आने का इंतजार है। वर्षों बाद जबलपुर को जोड़ते हुए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनने की खबर मिली, तो उम्मीद जगी कि अब क्षेत्र में उद्योग स्थापित होंगे। उन्होंने जबलपुर के उद्योगपतियों की प्रसन्नता जाहिर करती तस्वीरों का भी जिक्र किया। हालांकि, इस खुशी के बीच विश्नोई ने योजना की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक नहीं पहुंचने पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उद्योगों के आने और योजना के क्रियान्वयन को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
‘हम जैसे छोटे जनप्रतिनिधियों को भी बता देते’
बीजेपी विधायक ने अपनी पोस्ट में व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि काश, योजना बनाते समय नहीं तो उसके बन जाने के बाद ही उन जैसे छोटे जनप्रतिनिधियों को बता दिया जाता कि योजना आखिर है क्या, जमीन पर कब उतरेगी और इसमें जबलपुर के लिए क्या प्रावधान हैं। उनकी इस टिप्पणी को औद्योगिक विकास से जुड़ी योजनाओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद और समन्वय की कमी पर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है।
मझौली विकासखंड को कॉरिडोर में शामिल किए जाने पर जताई खुशी
अजय विश्नोई ने कहा कि उन्हें यह जानकर और अधिक प्रसन्नता हुई कि इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में उनकी पाटन विधानसभा के मझौली विकासखंड को भी शामिल किया गया है। इसके बावजूद क्षेत्र में आने वाले उद्योगों, परियोजना की समयसीमा और स्थानीय स्तर पर होने वाले लाभों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। उनकी पोस्ट में औद्योगिक निवेश की घोषणाओं और धरातल पर उद्योग स्थापित होने के बीच के अंतर को लेकर भी चिंता झलकती है।
पहले भी अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं विश्नोई
अजय विश्नोई बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और पूर्व में मंत्री भी रह चुके हैं। वे समय-समय पर सार्वजनिक मुद्दों और सरकारी कामकाज को लेकर अपनी राय सोशल मीडिया पर रखते रहे हैं। इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर उनकी ताजा पोस्ट ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। इस बयान से औद्योगिक विकास की योजनाओं में पारदर्शिता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और निवेश को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।