Amarnath Yatra News: जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश, भूस्खलन और खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा की रफ्तार थाम दी है। 19 जुलाई से यात्रा स्थगित होने के कारण मध्य प्रदेश के 1,000 से अधिक श्रद्धालु जम्मू, पहलगाम और बालटाल समेत अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं। इनमें भोपाल के करीब 300 श्रद्धालु भी शामिल हैं, जो मौसम साफ होने और प्रशासन से यात्रा शुरू होने की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यात्रा रुकने से न केवल दर्शन प्रभावित हुए हैं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं का पूरा यात्रा कार्यक्रम भी बिगड़ गया है। होटलों के बढ़ते किराए, वापसी के रिजर्वेशन और लगातार बढ़ते इंतजार ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है।
19 जुलाई से रुकी अमरनाथ यात्रा, हजारों श्रद्धालु इंतजार में
लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 19 जुलाई से अमरनाथ यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी। सुरक्षा कारणों से नए जत्थों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन श्रद्धालुओं पर पड़ा है, जो पहले से यात्रा पर निकल चुके थे और अब जम्मू, पहलगाम या बालटाल में रुके हुए हैं।
MP के 1000 से ज्यादा श्रद्धालु फंसे, भोपाल के 300 यात्री भी शामिल
मध्य प्रदेश से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते हैं। इस बार भी कई जत्थे रवाना हुए थे, लेकिन मौसम ने उनकी यात्रा रोक दी। भोपाल के ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के अनुसार, उनके दो जत्थों के करीब 300 श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर में रुके हुए हैं। इसके अलावा इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर और अन्य जिलों से पहुंचे श्रद्धालुओं को मिलाकर 1,000 से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं।
वैष्णो देवी और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी जाने की अनुमति नहीं
श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें केवल अमरनाथ यात्रा ही नहीं, बल्कि वैष्णो देवी, शिवखोड़ी और बूढ़ा महादेव जैसे अन्य धार्मिक स्थलों की ओर भी आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही। प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से यह फैसला लिया गया है।
होटल-होम स्टे महंगे, बढ़ा यात्रियों का खर्च
यात्रा रुकने से जम्मू और आसपास के इलाकों में अचानक श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। इसका असर ठहरने की व्यवस्था पर भी पड़ा है-
कई होटल और होम-स्टे के किराए बढ़ गए हैं।
बजट में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
कई लोग गुरुद्वारों और लंगरों में भोजन कर रहे हैं।
कुछ श्रद्धालु धर्मशालाओं में भी रुके हुए हैं।
सबसे बड़ी चिंता- वापसी का रिजर्वेशन
श्रद्धालुओं के सामने अब सबसे बड़ी परेशानी वापसी की यात्रा को लेकर है। अधिकांश यात्रियों ने ट्रेन और फ्लाइट की टिकटें कई महीने पहले बुक कराई थीं। यात्रा में देरी होने से अब उनके रिजर्वेशन प्रभावित होने की आशंका है। यदि यात्रा दोबारा शुरू होने में और समय लगता है तो हजारों यात्रियों को टिकट रद्द कराने या नई टिकट बुक कराने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
पहलगाम और बालटाल कैंपों में भी रुके श्रद्धालु
जो श्रद्धालु पहले ही पहलगाम और बालटाल तक पहुंच चुके थे, उन्हें भी फिलहाल आगे जाने की अनुमति नहीं है। वे कैंपों और लंगरों में रुककर मौसम सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां और सेना लगातार पूरे यात्रा मार्ग पर निगरानी बनाए हुए हैं।
यात्रा कब शुरू होगी?
फिलहाल प्रशासन ने यात्रा दोबारा शुरू करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। मौसम की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। मौसम में सुधार और मार्ग सुरक्षित होने के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।