भोपाल- मानसून की शुरुआत के साथ भोपाल में डेंगू ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल 9 जुलाई तक डेंगू की जांच पिछले साल की तुलना में 32 फीसदी कम हुई है, लेकिन मरीजों की संख्या लगभग बराबर रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल 2,730 जांच में 44 मरीज डेंगू पॉजिटिव मिले, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,016 जांच में 43 मरीज सामने आए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि कम जांच के बावजूद समान संख्या में मरीज मिलना संक्रमण बढ़ने का शुरुआती संकेत है।
50 फीसदी बढ़ी डेंगू की पॉजिटिविटी दर
आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल डेंगू की पॉजिटिविटी दर 1.07 फीसदी थी, जो इस साल बढ़कर 1.61 फीसदी हो गई है। यानी संक्रमण मिलने की दर में करीब 50.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि इस वर्ष भी पिछले साल जितनी जांच होतीं, तो अनुमान है कि मरीजों की संख्या करीब 65 तक पहुंच सकती थी।
अगले 45 दिन सबसे ज्यादा संवेदनशील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के दूसरे सप्ताह से अगस्त के अंत तक का समय डेंगू के लिहाज से सबसे संवेदनशील होता है। लगातार बारिश के कारण जगह-जगह साफ पानी जमा होने से एडीज मच्छर तेजी से पनपता है। इस मच्छर का जीवनचक्र 7 से 10 दिन का होता है और इसके काटने के 4 से 10 दिन बाद लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में जुलाई का संक्रमण अगस्त में मरीजों की संख्या बढ़ा सकता है।
44 टीमें मैदान में, लाखों घरों का सर्वे
संक्रमण रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। विभाग की 44 टीमें लगातार फील्ड में निगरानी कर रही हैं। जनवरी से अब तक 2.16 लाख से अधिक घरों का सर्वे किया गया है। 5,259 पानी भरे कंटेनरों में लार्वा नष्ट किया गया है और जल स्रोतों में 30 हजार गंबूशिया मछलियां छोड़ी गई हैं। इसके अलावा 38 कार्यशालाएं और 21 जागरूकता शिविर भी आयोजित किए गए हैं।
इन इलाकों पर विशेष नजर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार साकेत नगर इस समय सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है। इसके अलावा अशोका गार्डन, कोलार, कटारा, अयोध्या नगर, गोविंदपुरा, छोला, करोंद, बैरागढ़ और शाहपुरा में भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। जहां भी मरीज मिल रहे हैं, वहां फॉगिंग, लार्वा नष्ट करने और जागरूकता अभियान तेज कर दिए गए हैं।
सीएमएचओ ने लोगों से की सावधानी बरतने की अपील
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, कूलर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करने तथा बुखार आने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है। उनका कहना है कि समय रहते सतर्कता बरतने से डेंगू के बढ़ते खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
मलेरिया और चिकनगुनिया के आंकड़ों से राहत
डेंगू के विपरीत मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में कमी दर्ज की गई है। इस साल मलेरिया की 1.21 लाख से अधिक जांच में केवल 4 मरीज मिले, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 5 मरीज मिले थे। वहीं चिकनगुनिया की 615 जांच में 9 मरीज सामने आए, जबकि पिछले साल 991 जांच में 48 मरीज मिले थे।