भोपाल,- मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर चल रही चर्चा के बीच रविवार को भोपाल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। राजधानी के कोहेफिजा स्थित मेजबान शादी हॉल में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होने वाले इस कार्यक्रम में UCC के प्रस्तावित स्वरूप, संवैधानिक प्रावधानों, कानूनी प्रभावों और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। बैठक में विभिन्न मुस्लिम संगठनों, उलेमा, अधिवक्ताओं, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
पूर्व DGP समेत कई विशेषज्ञ रखेंगे अपनी बात
बैठक में छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) एम.डब्ल्यू. (मोहम्मद वज़ीर) अंसारी, वरिष्ठ अधिवक्ता साजिद अली, भोपाल के पूर्व महापौर दीपचंद यादव और एआईएमआईएम मध्य प्रदेश के अध्यक्ष मोहसिन अली खान प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। सभी विशेषज्ञ UCC के संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक प्रभावों पर अपने विचार साझा करेंगे और विभिन्न पक्षों पर चर्चा करेंगे।
संवाद के जरिए अलग-अलग पक्षों को समझने की कोशिश
आयोजकों का कहना है कि इस बैठक का उद्देश्य किसी एक पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में व्यापक संवाद को बढ़ावा देना है। इसके लिए भोपाल की विभिन्न तंजीमों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, उलेमा, अधिवक्ताओं और बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया गया है ताकि सभी वर्ग अपने सुझाव और राय रख सकें।
UCC पर मिले लाखों सुझाव, महिलाओं का समर्थन अधिक
मध्य प्रदेश सरकार ने UCC लागू करने से पहले आम नागरिकों से सुझाव मांगे थे। राज्य स्तरीय समिति को अब तक करीब साढ़े नौ लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय से लगभग 44 हजार सुझाव मिले, जिनमें 29 हजार पुरुष और 15 हजार महिलाएं शामिल थीं। इनमें केवल 38 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने UCC का समर्थन किया, जबकि 71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने इसके पक्ष में अपनी राय दी। यह आंकड़ा समाज के भीतर राय के अंतर को भी दर्शाता है।
महिलाओं के समर्थन की वजह क्या मानी जा रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मुस्लिम महिलाओं का समर्थन पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, बहुविवाह पर रोक, तीन तलाक जैसे मुद्दों पर पहले हुए कानूनी बदलाव और गुजारा भत्ता जैसी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अपेक्षाओं के कारण अधिक देखने को मिला है। इसे महिलाओं के अधिकारों और कानूनी सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर भी हो सकता है नया प्रावधान
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्तावित UCC मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीयन का प्रावधान भी शामिल होने की चर्चा है। प्रस्ताव के अनुसार लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने संबंध का रजिस्ट्रेशन कराना होगा और अलग होने की स्थिति में भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार द्वारा मसौदा जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।