भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शनिवार को BRICS देशों के संस्कृति मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करेगी। बैठक में सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने, साझा विरासत को संरक्षित करने तथा संस्कृति को रचनात्मक अर्थव्यवस्था से जोड़ने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।बैठक में सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने को लेकर साझा रणनीति तैयार करने पर जोर रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बैठक में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों के सम्मान में लंच भी आयोजित करेंगे।
विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे
भोपाल में चल रहे BRICS Cultural Conference 2026 का शनिवार का कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन की शुरुआत 5 अगस्त से हुई थी और अब इसके अंतिम चरण में सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री आपसी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।इसमें सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने पर भी जोर दिया जा सकता है। संस्कृति को लोगों के बीच संबंध मजबूत करने के माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में भी चर्चा होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देंगे विदेशी मेहमानों को लंच
बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विदेशी संस्कृति मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के सम्मान में दोपहर के भोजन का आयोजन करेंगे। शुक्रवार को सभी विदेशी प्रतिनिधि भोपाल पहुंच चुके थे, जहां उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।राज्य सरकार की ओर से मेहमानों के लिए मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और पाक परंपराओं को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है। लंच और डिनर के मेन्यू में प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया है, ताकि विदेशी मेहमानों को मध्यप्रदेश की स्थानीय संस्कृति का स्वाद भी मिल सके।
दाल-बाफला से मिलेट्स तक खास रहेगा मेन्यू
BRICS देशों से आए प्रतिनिधियों के लिए तैयार भोजन में मध्यप्रदेश के कई पारंपरिक व्यंजनों को जगह दी गई है। मेन्यू में दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया और बड़ा जैसे स्थानीय व्यंजन शामिल हैं।इसके साथ ही मोटे अनाज यानी मिलेट्स से तैयार कोदो और कुटकी के व्यंजन भी परोसे जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की अलग-अलग पसंद को ध्यान में रखते हुए भारतीय व्यंजनों के साथ वेस्टर्न और ओरिएंटल फूड की भी व्यवस्था की गई है। इस तरह भोजन के जरिए भी प्रदेश की स्थानीय परंपरा और वैश्विक स्वाद का समन्वय दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।
सांची की यात्रा में दिखेगी भारत की बौद्ध विरासत
बैठक और लंच के बाद विदेशी संस्कृति मंत्री तथा प्रतिनिधिमंडल सांची के लिए रवाना होंगे। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची की यात्रा का उद्देश्य विदेशी मेहमानों को भारत की समृद्ध बौद्ध परंपरा, स्थापत्य और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।प्रतिनिधियों के लिए 'बुद्ध जंबूदीप' का भ्रमण और विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का विशेष गाइडेड टूर आयोजित किया जाएगा। इस दौरान उन्हें सांची के ऐतिहासिक महत्व और यहां मौजूद बौद्ध स्थापत्य की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।
चेतियागिरी मंदिर में दर्शन और योग-ध्यान सत्र
सांची प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल चेतियागिरी मंदिर भी जाएगा। यहां दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र का आयोजन किया जाएगा।BRICS प्रतिनिधियों के लिए तैयार कार्यक्रम में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को भी शामिल किया गया है। योग और ध्यान के माध्यम से उन्हें भारतीय जीवन पद्धति के इस महत्वपूर्ण पक्ष से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
3D प्रोजेक्शन और लाइट एंड साउंड शो होगा आकर्षण
सांची यात्रा के दौरान शाम के कार्यक्रम में बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाएगा।तकनीक और इतिहास के इस संयोजन के जरिए प्रतिनिधियों को सांची की विरासत को एक अलग और आधुनिक तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। बौद्ध इतिहास, कला और स्थापत्य से जुड़ी जानकारियों को दृश्य माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
BRICS सम्मेलन से मध्यप्रदेश को वैश्विक सांस्कृतिक मंच
भोपाल में संस्कृति मंत्रियों की बैठक केवल एक आधिकारिक सम्मेलन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर भी है।भोपाल, सांची और प्रदेश की अन्य ऐतिहासिक-सांस्कृतिक धरोहरों को विदेशी प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किए जाने से राज्य की विरासत, पर्यटन और रचनात्मक क्षेत्रों को वैश्विक मंच पर पहचान मिलने की संभावना है।विशेष रूप से सांची जैसे विश्व धरोहर स्थल की यात्रा से प्रतिनिधियों को भारत की प्राचीन सभ्यता और बौद्ध संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
संस्कृति के साथ क्रिएटिव इकोनॉमी पर भी फोकस
BRICS बैठक में संस्कृति को केवल विरासत संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय क्रिएटिव इकोनॉमी के साथ जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।कला, संग्रहालय, सांस्कृतिक उद्योग, रचनात्मक प्रतिभाओं और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के तरीकों पर सदस्य देशों के बीच अनुभव साझा किए जा सकते हैं।साथ ही सांस्कृतिक संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और युवाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा होंगे।
भीमबेटका की यात्रा का भी विकल्प
विदेशी प्रतिनिधियों के लिए सम्मेलन के बाद भीमबेटका शैलाश्रय की वैकल्पिक यात्रा का भी प्रावधान किया गया है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका अपने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और रॉक आर्ट के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।यह भ्रमण विदेशी मेहमानों को भारत की प्राचीन मानव सभ्यता और शैल कला की समृद्ध परंपरा से परिचित कराने का अवसर देगा। भीमबेटका की गुफाओं और शैलाश्रयों में मौजूद चित्र भारत के प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं।
भोपाल से सांची और भीमबेटका तक दिखेगी मध्यप्रदेश की विरासत
BRICS संस्कृति सम्मेलन के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों को केवल बैठक और चर्चाओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से सीधे जोड़ने की व्यापक योजना बनाई गई है।भोपाल में अंतरराष्ट्रीय बैठक, सांची की बौद्ध विरासत और भीमबेटका की प्रागैतिहासिक रॉक आर्ट—इन तीनों के जरिए मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।