दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के कई बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के अंतिम दौर में बड़े नेताओं की एंट्री हो सकती है, जबकि फिलहाल स्थानीय नेतृत्व प्रचार की कमान संभाले हुए है।
कांग्रेस के कई दिग्गज अब तक नहीं पहुंचे
कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं ने अब तक दतिया में चुनाव प्रचार नहीं किया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अभी तक चुनाव प्रचार से पूरी दूरी बनाए रखी है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह केवल कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के नामांकन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसके अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा और विधायक आरिफ मसूद भी अब तक दतिया नहीं पहुंचे हैं। हालांकि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार चुनाव प्रचार के अंतिम तीन दिनों में दतिया में रहकर प्रचार करेंगे।
भाजपा के भी कई स्टार प्रचारक नहीं पहुंचे
भारतीय जनता पार्टी के भी कई बड़े नेता अब तक दतिया उपचुनाव के प्रचार से दूर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वीरेंद्र खटीक ने अब तक दतिया में चुनाव प्रचार नहीं किया है। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मंत्री प्रह्लाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह सहित कई दिग्गज नेताओं की प्रचार सभाएं अब तक नहीं हुई हैं।
अंतिम चरण में बदल सकती है रणनीति
चुनाव प्रचार अपने अंतिम दौर में है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मतदान से पहले दोनों दल अपने प्रमुख नेताओं की सभाओं और रोड शो के जरिए चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि अभी तक दोनों पार्टियों का जोर स्थानीय नेताओं और संगठन के माध्यम से प्रचार अभियान चलाने पर दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
दतिया उपचुनाव में बड़े नेताओं की सीमित मौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि भाजपा और कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।