जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर के लिए गर्व की बात है कि यहां की प्रसिद्ध जबलपुरी मटर और सिंघाड़े को आधिकारिक तौर पर जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ जबलपुर की पहचान राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और मजबूत हो गई है। खास बात यह है कि भारत में पहली बार मटर और सिंघाड़ा श्रेणी में किसी क्षेत्र को GI टैग मिला है।
नर्मदा की मिट्टी और पानी ने दिलाई खास पहचान
जबलपुर की उपजाऊ मिट्टी और नर्मदा नदी के जल से तैयार होने वाली मटर और सिंघाड़ा अपनी गुणवत्ता, स्वाद और विशिष्टता के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहे हैं। अब GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की अलग पहचान को कानूनी मान्यता मिल गई है।
किसानों को मिलेगा बेहतर दाम
- GI टैग मिलने से स्थानीय किसानों को कई बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है।
- फसल का बेहतर और उचित मूल्य मिलेगा।
- देश और विदेश के बाजारों में मांग बढ़ेगी।
- किसानों की आय में वृद्धि होगी।
- स्थानीय कृषि उत्पादों की ब्रांड वैल्यू मजबूत होगी।
नकली 'जबलपुरी' ब्रांडिंग पर लगेगी रोक
अब तक कई स्थानों पर दूसरे क्षेत्रों के उत्पादों को भी 'जबलपुरी' नाम से बेचा जाता था। GI टैग मिलने के बाद 'जबलपुरी मटर' और 'जबलपुरी सिंघाड़ा' नाम को कानूनी संरक्षण मिल गया है। बिना अनुमति इन नामों का उपयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
रोजगार और फूड प्रोसेसिंग को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने के बाद जबलपुर में फूड प्रोसेसिंग उद्योग को नई गति मिलेगी। इससे मटर और सिंघाड़े पर आधारित नए उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही, क्षेत्र में निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
जबलपुर की पहचान को मिली नई उड़ान
GI टैग मिलने से जबलपुर की कृषि विरासत को नई पहचान मिली है। नर्मदा की धरती पर उगने वाले इन उत्पादों का स्वाद अब वैश्विक बाजार तक पहुंचेगा और किसानों की मेहनत को उचित सम्मान और बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।