Ashadh Month 2026: सनातन धर्म में आषाढ़ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी महीने भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास का शुभारंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे माह में पूजा-पाठ, व्रत, जप, तप और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आषाढ़ माह 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई 2026 तक रहेगा। 29 जुलाई को ही आषाढ़ पूर्णिमा भी मनाई जाएगी।
आषाढ़ माह में भूलकर भी न करें ये काम
- धर्म शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ माह में कुछ कार्यों से बचना चाहिए।
- विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य न करें।
- जल का अपमान या बर्बादी न करें।
- बासी भोजन का सेवन न करें।
- अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन खाने से बचें।
- मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- पालक, पत्तागोभी जैसी पत्तेदार सब्जियां, बैंगन और मसूर की दाल खाने से परहेज करें।
- झगड़ा, विवाद और कटु वचन बोलने से बचें।
आषाढ़ माह में क्या करना शुभ माना जाता है?
- आषाढ़ माह में इन कार्यों को विशेष शुभ माना गया है।
- प्रतिदिन स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
- भगवान विष्णु की नियमित पूजा करें।
- विष्णु सहस्रनाम और विष्णु मंत्रों का जाप करें।
- जप, तप, ध्यान और धार्मिक साधना में समय दें।
- सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाएं।
- तरबूज, खरबूजा और खीरे जैसे मौसमी फलों का सेवन करें।
- जरूरतमंदों को छाता, चप्पल और मौसमी फलों का दान करें।
- एकादशी, अमावस्या या पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करें।
आषाढ़ माह का धार्मिक महत्व
आषाढ़ माह भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह समय भक्ति, साधना, जप और तप के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।