नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आखिरी दौर में सोमवार का दिन राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने वाला है। लोकसभा में आज कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं, जबकि विपक्ष ने FCRA, छात्र आंदोलन और परिसीमन समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। ऐसे में सदन की कार्यवाही के दौरान हंगामे के आसार बने हुए हैं। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त तक चलना प्रस्तावित है। सत्र के अंतिम दिनों में सरकार जहां लंबित विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकता है।
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला विधेयक
सोमवार को लोकसभा में सबसे अधिक चर्चा केरल के आधिकारिक नाम को बदलकर ‘केरलम’ करने वाले विधेयक को लेकर है। केंद्र सरकार इस संबंध में विधेयक पेश करने की तैयारी में है। विधेयक कानून बनने के बाद संविधान और केंद्रीय कानूनों में जहां-जहां राज्य के नाम का उल्लेख है, वहां आवश्यक संशोधन किए जा सकेंगे। केरल में लंबे समय से राज्य के आधिकारिक नाम के तौर पर ‘केरलम’ इस्तेमाल करने की मांग उठती रही है।
FCRA संशोधन विधेयक का कांग्रेस करेगी विरोध
विदेशी चंदे से जुड़े Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) में संशोधन का मुद्दा भी संसद में राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार FCRA में संशोधन से जुड़ा विधेयक संसद में लाती है तो कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसका विरोध करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित बदलावों के जरिए अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाया जा सकता है। विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह विधेयक को लेकर सदन में सरकार को घेरने की तैयारी में है।
छात्र आंदोलन का मुद्दा भी उठाएगा विपक्ष
विपक्ष छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी संसद में उठा सकता है। केसी वेणुगोपाल ने सवाल किया है कि छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल के आदेश किस स्तर से दिए गए। विपक्ष सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब और कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ करने की मांग कर सकता है।
परिसीमन विधेयक पर भी सियासी घमासान
परिसीमन का मुद्दा भी संसद में महत्वपूर्ण रहने वाला है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रस्तावित परिसीमन को लेकर चिंता जताई है। विपक्ष का तर्क है कि यदि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्विन्यास किया जाता है तो उन राज्यों को राजनीतिक नुकसान हो सकता है, जिन्होंने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। यही मुद्दा दक्षिणी राज्यों और केंद्र के बीच राजनीतिक बहस का बड़ा कारण बन सकता है।
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विधेयक भी एजेंडे में
सोमवार को संसद में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों में बदलाव के प्रस्ताव भी शामिल हैं। सरकार वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित कानूनों को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप अपडेट करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इन विधेयकों को लेकर भी सदन में चर्चा और राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
विपक्ष की रणनीति क्या है?
विपक्ष की रणनीति केवल विधेयकों के विरोध तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल कुछ मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग कर रहे हैं। छात्र प्रदर्शनों, पुलिस कार्रवाई, परिसीमन और FCRA को लेकर विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। यदि विपक्ष को अपनी मांगों पर सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो सदन में हंगामा बढ़ सकता है।
आखिरी दिनों में सरकार के सामने बड़ी चुनौती
मानसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार के सामने लंबित विधायी कामकाज पूरा करने की चुनौती है। वहीं विपक्ष अपनी राजनीतिक मांगों को सदन में मजबूती से उठाने की तैयारी में है। ऐसे में सोमवार को ‘केरलम’ नाम वाला विधेयक, FCRA संशोधन, परिसीमन और छात्र आंदोलन संसद की कार्यवाही के प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने पर सदन की कार्यवाही प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।