प्रयागराज, 10 अगस्त 2026 | प्रयागराज के नवाबगंज टोल प्लाजा पर कथित हंगामे के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना उस समय हुई, जब दिवंगत पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे उमर अहमद को पुलिस सुरक्षा में लखनऊ जेल से प्रयागराज लाया जा रहा था। टोल प्रबंधन की शिकायत के अनुसार सरकारी एस्कॉर्ट वाहन गुजरने के बाद पीछे चल रहे करीब 28 निजी वाहन एक साथ बूथ नंबर-3 पर पहुंचे। आरोप है कि इन वाहनों के चालकों ने टोल शुल्क दिए बिना आगे निकलने का प्रयास किया और इस दौरान बैरियर क्षतिग्रस्त हुआ।
टोल कर्मचारियों ने क्या आरोप लगाए?
नवाबगंज टोल प्लाजा के सहायक प्रबंधक जयप्रकाश यादव की ओर से दी गई शिकायत में कहा गया है कि कर्मचारियों ने निजी वाहनों को शुल्क चुकाने के लिए रोकने का प्रयास किया था। शिकायत के मुताबिक, इसके बाद कुछ वाहन चालकों और उनमें सवार लोगों ने कथित रूप से गाली-गलौज और अभद्रता की। कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी देने तथा तेज रफ्तार वाहन उनकी ओर बढ़ाकर कुचलने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है। कर्मचारी किनारे हटे, जिसके बाद वाहन टोल प्लाजा से निकल गए। ये सभी आरोप FIR और शिकायत का हिस्सा हैं; इन्हें अभी अदालत या जांच में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
28 वाहनों से जुड़े चालकों पर दर्ज हुआ मामला
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नवाबगंज पुलिस ने 28 पहचाने गए वाहनों से जुड़े चालकों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कुछ रिपोर्टों में इन्हें “28 नामजद वाहन” कहा गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 28 व्यक्तियों के नाम निश्चित रूप से सार्वजनिक हो चुके हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि वाहन किसके नाम पर पंजीकृत हैं, घटना के समय उन्हें कौन चला रहा था और उनमें कौन-कौन सवार था। वाहन मालिक और घटना के समय चालक अलग व्यक्ति भी हो सकते हैं, इसलिए केवल पंजीकरण रिकॉर्ड से आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं होगी।
क्या FIR उमर अहमद के खिलाफ भी है?
प्रकाशित रिपोर्टों में FIR की भाषा को लेकर कुछ अंतर है। अधिकतर रिपोर्टों में मामला उमर को ले जा रहे सरकारी वाहन के पीछे चल रहे निजी वाहनों के चालकों से संबंधित बताया गया है। एक स्थानीय रिपोर्ट ने उमर का नाम भी FIR में शामिल होने का दावा किया है, लेकिन इसकी आधिकारिक प्रति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए अभी यह लिखना उचित नहीं होगा कि उमर अहमद ने स्वयं बैरियर तोड़ा, कर्मचारियों को धमकाया या निजी वाहनों को ऐसा करने का निर्देश दिया। उसकी व्यक्तिगत भूमिका, यदि कोई थी, पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगी। सरकारी पुलिस एस्कॉर्ट वाहनों पर टोल तोड़ने का आरोप नहीं है। शिकायत का केंद्र उनके पीछे चल रहे निजी वाहन हैं।
CCTV और वाहन विवरण से होगी पहचान
टोल प्लाजा पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराई गई है। पुलिस फुटेज की मदद से वाहनों का रंग, मॉडल, नंबर प्लेट और उनमें मौजूद लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ वाहनों के नंबर अधूरे दर्ज हुए, जबकि कुछ पर नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं थी या लगी नहीं दिखाई दी। नवाबगंज थाना प्रभारी पंकज अवस्थी ने वाहन विवरण के आधार पर चालकों की पहचान किए जाने की बात कही है।
उमर अहमद को प्रयागराज क्यों लाया गया था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उमर अहमद और उसके भाई अली अहमद को अपने छोटे भाई आबान अहमद के सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने के लिए सीमित पैरोल दी थी। आबान की झांसी में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उमर लखनऊ जेल और अली झांसी जेल में बंद था। अदालत की अनुमति के बाद दोनों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रयागराज लाया गया। उमर की यात्रा सामान्य रिहाई नहीं, बल्कि पारिवारिक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए न्यायालय की शर्तों वाली सीमित अनुमति थी।
घटना के समय को लेकर रिपोर्टों में अंतर
घटना का समय अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में समान नहीं है। एक रिपोर्ट में 8 और 9 अगस्त की मध्यरात्रि के बाद करीब 3:50 बजे का उल्लेख है, जबकि दूसरी रिपोर्ट टोल प्रबंधन के हवाले से शनिवार दोपहर करीब 3:45 बजे घटना बताती है। समय की अंतिम पुष्टि FIR की प्रमाणित प्रति, टोल ट्रांजैक्शन लॉग और CCTV टाइमस्टैम्प से होगी। इसलिए कॉपी में केवल “8 अगस्त को पुलिस एस्कॉर्ट गुजरने के दौरान” लिखना फिलहाल अधिक सुरक्षित है।
प्रतापगढ़ के भदरी टोल पर भी अलग मामला
कुछ रिपोर्टों के अनुसार इसी यात्रा के दौरान प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र स्थित भदरी टोल प्लाजा पर भी दो निजी वाहनों पर बैरियर क्षतिग्रस्त करने और कर्मचारियों से अभद्रता का आरोप लगा। वहां हथिगवां पुलिस ने वाहन नंबरों के आधार पर अलग मामला दर्ज किया है। नवाबगंज और भदरी टोल के मामले अलग-अलग शिकायतों तथा पुलिस थानों से संबंधित हैं। दोनों घटनाओं की जांच भी संबंधित जिलों की पुलिस अलग-अलग करेगी।
क्या टोल प्लाजा पर यातायात अभी प्रभावित है?
उपलब्ध रिपोर्टों में नवाबगंज टोल प्लाजा को बंद करने या सामान्य यातायात रोकने की कोई सूचना नहीं है। मामला बीते घटनाक्रम, संपत्ति नुकसान और कथित आपराधिक व्यवहार की जांच से संबंधित है। स्थानीय यात्रियों को घटना के कारण किसी स्थायी डायवर्जन या टोल छूट की घोषणा नहीं की गई है। जांच के दौरान पुलिस CCTV रिकॉर्ड और संदिग्ध वाहनों के दस्तावेज जुटा सकती है।
FAQ: नवाबगंज टोल प्लाजा FIR
1. नवाबगंज टोल मामले में कितने वाहनों पर FIR हुई?
टोल प्रबंधन की शिकायत पर 28 पहचाने गए वाहनों से जुड़े चालकों तथा अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
2. वाहन चालकों पर क्या आरोप हैं?
बिना शुल्क दिए टोल पार करने, बैरियर को नुकसान पहुंचाने, कर्मचारियों से अभद्रता, धमकी और उनकी ओर वाहन बढ़ाने के आरोप हैं। सभी आरोप जांच के अधीन हैं।
3. क्या उमर अहमद को भी आरोपी बनाया गया है?
रिपोर्टों में इस बिंदु पर अंतर है। अधिकतर प्रकाशित जानकारी में आरोप पीछे चल रहे निजी वाहनों के चालकों पर हैं। उमर की व्यक्तिगत भूमिका की आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
4. उमर अहमद पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज क्यों जा रहा था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे अपने छोटे भाई आबान अहमद के सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने के लिए सीमित पैरोल दी थी।
5. पुलिस आरोपियों की पहचान कैसे करेगी?
पुलिस टोल प्लाजा के CCTV, वाहन पंजीकरण विवरण, नंबर प्लेट, वाहन के रंग और मॉडल की जांच कर रही है।