रांची, 10 अगस्त 2026 | झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने सोमवार को विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए रांची पुलिस ने विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार ने उनकी कई मांगों पर सहमति जरूर जताई है, लेकिन JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच और अन्य लंबित मुद्दों पर संतोषजनक निर्णय नहीं हुआ। इसी कारण विधानसभा मार्च वापस नहीं लिया गया है।
विधानसभा के 750 मीटर दायरे में निषेधाज्ञा
रांची प्रशासन ने विधानसभा के 750 मीटर दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। मूल प्रशासनिक आदेश के अनुसार यह पाबंदी 6 अगस्त सुबह 8 बजे से 12 अगस्त रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगी। झारखंड हाईकोर्ट परिसर को प्रतिबंधित क्षेत्र से अलग रखा गया है।
प्रतिबंधित क्षेत्र में पांच या उससे अधिक लोगों के गैरकानूनी जमावड़े, जुलूस, मार्च, धरना, प्रदर्शन और सार्वजनिक सभा की अनुमति नहीं है। इसलिए छात्रों के मार्च को विधानसभा के निर्धारित प्रतिबंधित दायरे तक पहुंचने से पहले पुलिस बैरिकेडिंग पर रोका जा सकता है।
यह आदेश पूरे रांची शहर में कर्फ्यू नहीं है। सामान्य आवाजाही जारी रह सकती है, लेकिन विधानसभा क्षेत्र और पुलिस द्वारा चिह्नित संवेदनशील रास्तों पर अतिरिक्त जांच तथा यातायात नियंत्रण रह सकता है।
पुलिस बोली—शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर परेशानी नहीं
रांची पुलिस ने छात्रों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की है। सिटी एसपी पारस राणा के अनुसार पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को अनावश्यक परेशानी न हो, लेकिन हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रांची एसएसपी ने भी छात्रों से किसी ऐसी गतिविधि में शामिल न होने की अपील की है, जिससे उनके भविष्य या करियर पर प्रतिकूल असर पड़े। शहर के प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल और अवरोधक लगाए गए हैं।
सरकार ने किन मांगों पर सहमति जताई?
रविवार को हुई बातचीत के बाद झारखंड सरकार ने 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JPSC बैकलॉग-2023 और बैकलॉग-2025 परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताने की जानकारी दी। हालांकि उम्मीदवारों को अंतिम स्थिति के लिए JPSC की औपचारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।
सरकार ने इसके साथ कई अन्य कदमों की घोषणा की है:
- कथित आपराधिक अनियमितताओं की जांच CID से कराने की तैयारी।
- वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों पर ED जांच की अनुशंसा।
- जांच से जुड़े मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालत बनाने का प्रस्ताव।
- आरोपपत्र निर्धारित समय में दाखिल कराने पर जोर।
- IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों वाली समिति से परीक्षा सुधारों पर सुझाव।
- जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति का प्रस्ताव।
फिर भी क्यों जारी है विधानसभा मार्च?
मुख्य विवाद JSSC की Combined Graduate Level यानी CGL परीक्षा को लेकर बना हुआ है। प्रदर्शनकारी इसकी CBI जांच और कई मामलों में परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि CGL परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों तथा न्यायिक निगरानी में हुई थी। परिणाम जारी होने के बाद चयनित उम्मीदवार नियुक्त भी हो चुके हैं, इसलिए राज्य सरकार इसे एकतरफा रद्द नहीं कर सकती। सरकार ने CID जांच की निगरानी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन आंदोलनकारी CBI जांच की मांग पर कायम हैं।
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा है कि विधानसभा मार्च शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन CBI जांच की मांग पर समझौता नहीं किया जाएगा।
देवेंद्र नाथ महतो की सेहत को लेकर चिंता
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने भोजन त्याग वाला अनशन जारी रखने की घोषणा की है। प्रदर्शनकारियों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार उनके वजन में करीब 10.5 किलोग्राम की कमी आई है और रक्त शर्करा का स्तर 53 तक पहुंचने का दावा किया गया है। मेडिकल टीम ने उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। ये स्वास्थ्य आंकड़े आंदोलन स्थल से जारी दावे हैं; स्वतंत्र अस्पताल बुलेटिन सार्वजनिक नहीं हुआ है।
यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। देवेंद्र नाथ महतो ने 5 अगस्त को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील पर पानी और नमक लेना स्वीकार किया था। इससे उनका निर्जल उपवास समाप्त हुआ, लेकिन उन्होंने भोजन त्याग वाला अनशन जारी रखा। इसलिए यह लिखना अधिक सटीक होगा कि उन्होंने जल ग्रहण किया, लेकिन भूख हड़ताल समाप्त नहीं की।
सरकार की चार सदस्यीय मंत्री समिति ने वीडियो कॉल के माध्यम से उनका हालचाल लिया और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। इस समिति में सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव शामिल हैं।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव चाहते हैं। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच।
- कथित अनियमितता वाली परीक्षाओं पर निष्पक्ष निर्णय।
- जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियों और कथित परीक्षा माफिया पर कार्रवाई।
- अभ्यर्थियों को OMR कॉपी और Response Sheet उपलब्ध कराना।
- श्रेणीवार Cut-off सार्वजनिक करना।
- JPSC और JSSC में पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर लागू करना।
- परीक्षा एजेंसियों के चयन और निगरानी की स्पष्ट व्यवस्था।
- भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी एवं संस्थागत सुधार।
ये आरोप और मांगें प्रदर्शनकारी पक्ष की हैं। पेपर लीक, OMR में हेरफेर या दूसरी आपराधिक अनियमितताओं की अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।
JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार
झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार की अनुशंसा पर JPSC के तीन सदस्यों—अजिता भट्टाचार्य, अनीमा हांसदा और जमाल अहमद—के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। यह घटनाक्रम आंदोलन और परीक्षा विवाद के बीच सामने आया है।
इन इस्तीफों को किसी व्यक्ति का आपराधिक दोष सिद्ध होना नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित जिम्मेदारी जांच में मिले प्रमाणों के आधार पर तय होगी।
पीयूष मिश्रा ने आंदोलन स्थल पहुंचकर दिया समर्थन
अभिनेता, गायक और लेखक पीयूष मिश्रा ने रांची के धरना स्थल पहुंचकर आंदोलनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों के प्रति समर्थन जताया और कहा कि उनकी समस्याओं को सुनकर वह आंदोलन स्थल पहुंचे हैं।
धरना स्थल पर उन्होंने अपना चर्चित गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ भी सुनाया। हालांकि किसी कलाकार या सार्वजनिक व्यक्ति का समर्थन परीक्षा से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं माना जा सकता।
भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष को नजरबंद करने का लगाया आरोप
भाजपा के प्रदेश महासचिव अमर कुमार बाउरी ने आरोप लगाया है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के आवास के बाहर सुरक्षा बल तैनात कर उन्हें बाहर जाने से रोका गया। भाजपा ने इसे छात्रों के आंदोलन के समर्थन से रोकने की कार्रवाई बताया है।
इसे फिलहाल भाजपा के आरोप के रूप में ही प्रकाशित किया जाना चाहिए। पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से आदित्य साहू की औपचारिक गिरफ्तारी अथवा कानूनी हिरासत की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
रांची आने वाले छात्रों को रोके जाने का दावा
आंदोलनकारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि झारखंड के अलग-अलग जिलों से रांची आ रहे कई अभ्यर्थियों को पुलिस रास्ते में रोक रही है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
किस स्थान पर कितने छात्रों को रोका गया, इसका समेकित आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। इसलिए किसी निश्चित संख्या को स्वतंत्र पुष्टि के बिना प्रकाशित न करें।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
- यात्रियों के लिए: विधानसभा, धुर्वा और आसपास के रास्तों पर पुलिस बैरिकेडिंग तथा यातायात नियंत्रण से देरी हो सकती है।
- छात्रों के लिए: प्रतिबंधित क्षेत्र में निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस निर्देशों का पालन जरूरी है।
- JPSC अभ्यर्थियों के लिए: परीक्षा रद्द करने पर सरकार की सहमति के बावजूद औपचारिक आयोग नोटिस आने तक पुरानी सूचना को स्वतः निरस्त न मानें।
- JSSC-CGL उम्मीदवारों के लिए: सरकार ने फिलहाल परीक्षा रद्द करने से इनकार किया है। अंतिम कानूनी और प्रशासनिक स्थिति अदालत तथा जांच प्रक्रिया से प्रभावित हो सकती है।
- रांची के नागरिकों के लिए: विधानसभा क्षेत्र से जरूरी यात्रा करने वालों को अतिरिक्त समय लेकर निकलना और स्थानीय ट्रैफिक पुलिस के अपडेट देखना चाहिए।
FAQ: झारखंड छात्र आंदोलन और विधानसभा मार्च
1. झारखंड के छात्र आज विधानसभा मार्च क्यों कर रहे हैं?
छात्र JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, CGL मामले की CBI जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर मार्च कर रहे हैं।
2. विधानसभा के आसपास कितने क्षेत्र में निषेधाज्ञा है?
विधानसभा परिसर के 750 मीटर दायरे में BNSS की धारा 163 लागू है। मूल आदेश 6 अगस्त सुबह 8 बजे से 12 अगस्त रात 10 बजे तक प्रभावी है और झारखंड हाईकोर्ट परिसर को इससे बाहर रखा गया है।
3. सरकार ने कौन-सी परीक्षाएं रद्द करने पर सहमति जताई?
सरकार ने 14वीं JPSC, JPSC बैकलॉग-2023 और बैकलॉग-2025 परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताने की जानकारी दी है। उम्मीदवार अंतिम स्थिति के लिए JPSC की औपचारिक अधिसूचना देखें।
4. बातचीत के बाद भी आंदोलन क्यों जारी है?
सरकार ने JSSC-CGL को रद्द करने और CBI जांच की मांग स्वीकार नहीं की है। उसने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच का प्रस्ताव दिया, जबकि छात्र CBI जांच पर कायम हैं।
5. क्या देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन तोड़ दिया है?
उन्होंने सोनम वांगचुक की अपील पर पानी और नमक लिया था, जिससे निर्जल उपवास समाप्त हुआ। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार भोजन त्याग वाला अनशन जारी है।