वाराणसी, 10 अगस्त 2026 | ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश के बीच वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की स्थिति तेजी से बदल रही है। रविवार को नदी का स्तर 63.73 मीटर दर्ज किया गया। वाराणसी में चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। इस हिसाब से नदी अभी चेतावनी स्तर से करीब 6.53 मीटर और खतरे के निशान से लगभग 7.53 मीटर नीचे है। केंद्रीय जल आयोग की वर्गीकरण व्यवस्था के अनुसार किसी नदी का स्तर चेतावनी बिंदु से नीचे होने पर उसे सामान्य बाढ़ स्थिति माना जाता है। इसलिए वाराणसी में अभी आधिकारिक रूप से गंभीर या भीषण बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन घाटों और निचले तटवर्ती क्षेत्रों पर स्थानीय प्रभाव दिखाई देने लगा है।
तेज बहाव के कारण छोटी-बड़ी नावों पर रोक
वाराणसी प्रशासन ने रविवार से गंगा में छोटी और बड़ी सभी सामान्य नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। जल पुलिस के अनुसार नदी में तेज बहाव, हवा और उठ रही लहरों के बीच नाव चलाना यात्रियों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।
हालांकि यह रोक अभी क्रूज संचालन पर लागू नहीं है। जल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल क्रूज चल सकते हैं, लेकिन गंगा का स्तर और बढ़ने या सुरक्षा स्थितियां बदलने पर उनके संचालन को लेकर भी नया निर्णय लिया जा सकता है। इसलिए खबर में “सभी प्रकार की जल सेवाएं पूरी तरह बंद” लिखना सही नहीं होगा।
घाटों के बीच पैदल संपर्क कई हिस्सों में बाधित
गंगा का पानी घाटों की निचली सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म पर चढ़ने से कई घाटों के बीच पैदल आवाजाही प्रभावित हुई है। कुछ स्थानों पर घाट से घाट जाने वाला सीढ़ियों का संपर्क टूटने के कारण श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को तटवर्ती गलियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे सावन की भीड़ के बीच गलियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है।
मौजूदा रिपोर्टें घाटों की परस्पर कनेक्टिविटी गंभीर रूप से प्रभावित होने की पुष्टि करती हैं, लेकिन सभी 84 घाटों के प्रत्येक हिस्से का संपर्क पूरी तरह समाप्त होने की एक समान आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। अधिक सटीक भाषा होगी—“काशी के कई घाटों के बीच पैदल संपर्क टूट गया या बाधित हो गया है।”
ललिता घाट से विश्वनाथ धाम का प्रवेश बंद
गंगा का पानी काशी विश्वनाथ धाम के ललिता घाट स्थित गंगा द्वार तक पहुंचने के बाद इस मार्ग से श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया है। रविवार को गंगा द्वार के सामने केवल दो सीढ़ियां पानी से ऊपर बची थीं।
यह रोक केवल ललिता घाट और गंगा द्वार वाले प्रवेश मार्ग से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के सभी प्रवेश द्वार या सामान्य दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। श्रद्धालुओं को मंदिर प्रशासन और मौके पर तैनात पुलिस द्वारा बताए गए वैकल्पिक प्रवेश मार्गों का इस्तेमाल करना होगा।
गंगा आरती का स्थान 15 फीट पीछे किया गया
दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की ओर से आयोजित दैनिक गंगा आरती का स्थान बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निर्धारित स्थल से करीब 15 फीट पीछे किया गया। शनिवार को नई जगह पर आरती कराई गई और श्रद्धालुओं को पानी के करीब नहीं जाने की सलाह दी गई।
रविवार शाम पानी और बढ़ने के बाद आरती की व्यवस्था दोबारा बदली गई। आयोजकों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के अनुसार आरती स्थल को सुरक्षित दिशा में आगे भी स्थानांतरित किया जा सकता है, ताकि परंपरा जारी रहे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से समझौता न हो।
जल पुलिस और NDRF की गश्त बढ़ी
सावन के दूसरे सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के पहुंचने को देखते हुए जल पुलिस तथा NDRF ने गंगा में गश्त बढ़ा दी है। घाटों पर लोगों को गहरे पानी में नहीं जाने की हिदायत दी जा रही है और बांस-बल्लियों की सुरक्षा बैरिकेडिंग को जलस्तर के अनुसार ऊपर किया गया है।
श्रद्धालुओं को विशेष रूप से फिसलन वाली सीढ़ियों, तेज बहाव और जलमग्न घाटों से दूर रहने को कहा गया है। घाट पर मौजूद पुलिस, NDRF और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
डीएम ने NDRF की नाव से किया निरीक्षण
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने शनिवार को NDRF की नाव से गंगा और वरुणा नदी के तटवर्ती तथा संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने नमो घाट से केशव घाट, गंगा-वरुणा संगम, सलारपुर, सरैया, कोनिया, पुल कोहना, ढेलवरिया और सराय मोहना तक स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान नदी के जलस्तर, प्रवाह, संभावित जलभराव और तटवर्ती आबादी की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को जलस्तर में प्रत्येक बदलाव की नियमित निगरानी करने तथा किसी प्रतिकूल परिस्थिति से पहले एहतियाती कदम उठाने के निर्देश मिले हैं।
राहत शिविर और बचाव संसाधन अलर्ट पर
जिलाधिकारी ने पहले से चिन्हित बाढ़ राहत शिविरों, वहां तक जाने वाले मार्गों, नावों, राहत सामग्री और दूसरे जरूरी संसाधनों को सक्रिय अवस्था में रखने को कहा है। प्रशासन ने NDRF और अन्य बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
वरुणा नदी के किनारे रहने वाले परिवारों को घर-घर जाकर संभावित बाढ़, सुरक्षित स्थानों और प्रशासन की राहत व्यवस्था की जानकारी देने के भी निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अफवाहों के बजाय केवल प्रशासन की अधिकृत सूचना पर भरोसा करने की अपील की गई है।
मणिकर्णिका और ग्रामीण क्षेत्रों पर भी असर
मणिकर्णिका घाट का निचला शवदाह स्थल जलमग्न होने से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर चिरईगांव के ढाब क्षेत्र में कुछ रास्तों पर पानी आने से स्थानीय आवागमन प्रभावित हुआ है।
प्रशासन का आकलन है कि जलस्तर तीन से चार मीटर और बढ़ने पर नदी किनारे स्थित कुछ ग्रामीण तथा कृषि क्षेत्र अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए तटवर्ती गांवों और सब्जी उत्पादन वाले क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर क्या असर पड़ेगा?
- नाव यात्रियों के लिए: सामान्य नाव से गंगा भ्रमण फिलहाल संभव नहीं है। यात्रा से पहले प्रशासन की नई सूचना जांचें।
- काशी विश्वनाथ श्रद्धालुओं के लिए: ललिता घाट का गंगा द्वार बंद है। दूसरे निर्धारित प्रवेश मार्गों से जाना होगा।
- गंगा आरती देखने वालों के लिए: आरती बदले हुए स्थान से हो रही है। भीड़ में घाट की जलमग्न सीढ़ियों और बैरिकेडिंग से दूर रहें।
- नाविक परिवारों के लिए: संचालन बंद होने से पर्यटन और दैनिक आय प्रभावित होगी।
- तटवर्ती निवासियों के लिए: जलस्तर चेतावनी सीमा से नीचे है, लेकिन तेज बढ़ोतरी की स्थिति में प्रशासन के निकासी निर्देश का पालन करना जरूरी होगा।
घाट जाने से पहले रखें ये सावधानियां
- जलमग्न या काई लगी सीढ़ियों पर न उतरें।
- बैरिकेडिंग पार करके गंगा में स्नान न करें।
- बच्चों और बुजुर्गों को पानी के किनारे अकेला न छोड़ें।
- बंद गंगा द्वार से प्रवेश का प्रयास न करें।
- बिना अनुमति निजी नाव या डोंगी का इस्तेमाल न करें।
- अफवाह या पुराने बाढ़ वीडियो के बजाय प्रशासन का ताजा अपडेट देखें।
- किसी व्यक्ति के पानी में बहने या फंसने पर स्वयं कूदने के बजाय तत्काल जल पुलिस या NDRF को सूचित करें।