नई दिल्ली / कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। देश की शीर्ष अदालत ने उन्हें आंखों के इलाज के लिए तीन सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें बनर्जी की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी गई थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "प्रत्येक व्यक्ति को विदेश जाने और अपनी पसंद का इलाज चुनने का अधिकार है।"
डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर यात्रा और गोपनीयता की शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका कुछ निश्चित शर्तों के साथ स्वीकार की है। कोर्ट के निर्देशानुसार:
- अभिषेक बनर्जी अपनी यात्रा के लिए अपने डिप्लोमैटिक (कूटनीतिक) पासपोर्ट का उपयोग करेंगे।
- उन्हें अपना पूरा ट्रैवल शेड्यूल (यात्रा कार्यक्रम), रुकने का स्थान और जिस अस्पताल/चिकित्सक से वे इलाज कराएंगे, उसकी जानकारी जांच एजेंसियों को सौंपनी होगी।
- बनर्जी के वकील गोपाल शंकरनारायणन की अपील पर पीठ ने निर्देश दिया है कि इस यात्रा विवरण की गोपनीयता बरकरार रखी जाएगी और इसे किसी भी हाल में जनसमक्ष या सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार की आपत्तियां और सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. वी. राजू ने याचिका का कड़ा विरोध किया। राज्य सरकार ने दलील दी कि बनर्जी के खिलाफ कई मामले लंबित हैं और उनके देश लौटने पर संशय जताया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। बनर्जी के वकील ने अदालत को बताया कि उनका परिवार भारत में ही रहता है और वे एक सांसद हैं, इसलिए भागने की कोई आशंका नहीं है।
कोलकाता हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
इससे पहले, 5 अगस्त को कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की अर्जी खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने उन्हें कोलकाता स्थित राज्य संचालित एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था ताकि यह जांचा जा सके कि क्या विदेश में इलाज अनिवार्य है। हालांकि, बनर्जी द्वारा सरकारी मेडिकल बोर्ड के समक्ष जाने से इनकार करने पर हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।