बालाघाट। मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि इनकी मौत ‘केनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (CDV) नाम की खतरनाक बीमारी से हुई, जो संक्रमित कुत्तों के जरिए जंगल तक पहुंची।
भूख और निमोनिया ने ली जान
कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रविंद्र मणि त्रिपाठी के मुताबिक मृत बाघों के सैंपल जबलपुर वेटरिनरी साइंस कॉलेज भेजे गए थे, जहां CDV वायरस की पुष्टि हुई। विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस जानवरों की भूख खत्म कर देता है और गंभीर निमोनिया पैदा करता है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शावकों के पेट खाली मिले, जिससे साफ है कि वे लंबे समय तक भूखे रहे।
गांवों के कुत्तों से जंगल तक पहुंचा संक्रमण
वन विभाग का मानना है कि आसपास के गांवों में रहने वाले संक्रमित कुत्तों के जरिए यह वायरस जंगल तक पहुंचा। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने वन विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जंगल में अवैध रूप से घुसने वाले लोग अपने साथ कुत्ते लेकर जाते हैं, जिनसे यह संक्रमण फैला।
2018 में गिर में भी मचा चुका है तबाही
यह वही खतरनाक वायरस है जिसने साल 2018 में गुजरात के गिर नेशनल पार्क में 34 शेरों की जान ले ली थी। अब कान्हा में इसका मामला सामने आने से वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।
कान्हा में हाई अलर्ट, शुरू हुआ वैक्सीनेशन
वायरस की पुष्टि के बाद कान्हा प्रबंधन पूरी तरह अलर्ट पर है।
आसपास के 8 गांवों में कुत्तों और मवेशियों का टीकाकरण शुरू
अब तक 103 कुत्तों की पहचान, 94 का वैक्सीनेशन
5 किलोमीटर क्षेत्र में सघन निगरानी
40 ट्रैप कैमरे और हाथी दल तैनात
पर्यटक वाहनों के लिए डिसइन्फेक्टेंट टैंक बनाए गए