भोपाल। मध्यप्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (VBGRAM-G)' योजना 1 जुलाई से लागू होने जा रही है। नई योजना के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी जिलों को कार्ययोजना (एक्शन प्लान) तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
नई व्यवस्था लागू होने से पहले सरकार ने मनरेगा के तहत ऐसे सभी कार्य 30 जून तक पूरे करने का लक्ष्य तय किया है, जो नई योजना में शामिल नहीं किए गए हैं। यदि ये कार्य समय पर पूरे नहीं हुए तो इनके शेष खर्च का भार राज्य सरकार को उठाना पड़ सकता है। इनमें तालाबों में कटाव रोकने के लिए पत्थर के बंधान जैसे गैर-अनुमत कार्य भी शामिल हैं।
100 की जगह 125 दिन मिलेगा रोजगार
नई योजना के तहत ग्रामीण रोजगार के दायरे को और व्यापक बनाया गया है। मनरेगा में जहां 266 प्रकार के कार्य शामिल थे, वहीं वीबीजीराम-जी में इनकी संख्या बढ़ाकर 318 कर दी गई है।
इसके अलावा सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
नई योजना में वर्ष के दौरान 60 दिनों का ड्राई पीरियड भी प्रस्तावित किया गया है। इस अवधि में रोजगार संबंधी कार्य नहीं कराए जाएंगे।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस अवधि को लेकर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। हालांकि संभावना है कि इसे फसलों की कटाई के समय रखा जाएगा, क्योंकि उस दौरान अधिकांश श्रमिक कृषि कार्यों में व्यस्त रहते हैं।
नए जॉब कार्ड बनेंगे, पंचायतों का होगा वर्गीकरण
योजना लागू होने के बाद मजदूरों के लिए नए जॉब कार्ड जारी किए जाएंगे। हालांकि जब तक नए कार्ड तैयार नहीं हो जाते, तब तक पुराने मनरेगा जॉब कार्ड के आधार पर ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।वहीं विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने के लिए पंचायतों को ए, बी और सी तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा।
पिछड़े क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता
जिला मुख्यालय से दूर स्थित, पिछड़े और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) की अधिक आबादी वाली पंचायतों को 'सी' श्रेणी में रखा जाएगा। इन क्षेत्रों में सबसे अधिक विकास कार्य कराए जाएंगे।
इसके बाद 'बी' श्रेणी की पंचायतों में अपेक्षाकृत कम और 'ए' श्रेणी की पंचायतों में सबसे कम कार्य होंगे। पंचायतों का वर्गीकरण अब तक हुए विकास कार्यों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर किया जाएगा।