मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को जोरदार राजनीतिक हलचल के बीच हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस ने किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्षी विधायक गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे और खाद, बीज, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कर्ज माफी तथा सोयाबीन खरीद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। वहीं, सरकार आज समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करने की तैयारी में है।
सत्र के पहले दिन किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस का प्रदर्शन
मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में किसान खाद और बीज की किल्लत से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल आश्वासन दे रही है। प्रदर्शन के दौरान MSP, कर्ज माफी, सोयाबीन और मूंग की खरीद सहित कई मुद्दों पर नारेबाजी की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले— 'आज ऐतिहासिक दिन'
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा पहुंचने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि आज का दिन मध्य प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि सरकार आज समान नागरिक संहिता (UCC) सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में रखेगी। मुख्यमंत्री ने इसे स्वतंत्रता के बाद प्रदेश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि सरकार जनहित और सुशासन से जुड़े बड़े फैसले लेने जा रही है।
UCC पर सरकार का जोर
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि समान नागरिक संहिता समय की आवश्यकता है और इससे सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस पहल के लिए बधाई भी दी। महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा गौर ने भी कहा कि सरकार ने सही समय पर सही निर्णय लिया है और UCC प्रदेश के विकास एवं समान न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को खाद नहीं मिल रही है और केवल टोकन बांटे जा रहे हैं। सोयाबीन, मूंग और गेहूं उत्पादक किसान परेशान हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीर नहीं है। सिंघार ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय भाजपा किसानों से वोट मांगती है, लेकिन जब MSP, फसल खरीद और किसानों के हितों की बात आती है तो सरकार पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन में किसानों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की मांग करेगा और सरकार को जवाब देना होगा।
कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना का जवाब
कांग्रेस के आरोपों पर कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश में किसानों के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन किसानों को टोकन जारी किए गए हैं, उन्हें नियमानुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी और किसी भी किसान को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
UCC का कांग्रेस ने किया विरोध
कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरिया ने कहा कि मध्य प्रदेश में फिलहाल UCC की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाती, तब तक समान नागरिक संहिता लागू करने का कोई औचित्य नहीं है। कांग्रेस सदन में इस विधेयक का विरोध करेगी और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा करेगी।
सरकार लाएगी दो अध्यादेश
- मानसून सत्र के पहले दिन सरकार दो महत्वपूर्ण अध्यादेश भी सदन में प्रस्तुत करेगी—
- मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश, 2026
- मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026
- इसके अलावा सदन में दो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और 25 याचिकाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी।
पूरी तरह डिजिटल होगा विधानसभा सत्र
इस बार मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। सदन की कार्यवाही, दस्तावेज, प्रश्न, विधेयक और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यवाही को अधिक पारदर्शी, तेज और कागज रहित बनाना है।
24 जुलाई तक चलेगा मानसून सत्र
पांच दिवसीय मानसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। सरकार इस दौरान कुल 9 विधेयक सदन में प्रस्तुत करेगी।
इनमें प्रमुख रूप से—
- समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस संशोधन
- अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक
- निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक
- अन्य प्रशासनिक और विकास संबंधी विधेयक
- शामिल हैं।
हंगामेदार रहने के आसार
सत्र के दौरान किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, पेपर लीक, कानून-व्यवस्था, UCC और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। ऐसे में यह मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।