भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रही। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ कथित लाठीचार्ज और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे। विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर सदन में जमकर हंगामा किया। लगातार विरोध के चलते विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में पांच महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन में पारित हुए ये 5 महत्वपूर्ण विधेयक
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) संशोधन विधेयक
मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026
मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक-2026
मध्यप्रदेश निरसन विधेयक-2026
मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर गरमाई बहस
जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
किसानों के मुआवजे और आदिवासी जमीन का मुद्दा भी उठा
सदन में मंदसौर जिले के किसानों का लंबित मुआवजा भी प्रमुख मुद्दा रहा। कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने 15 हजार किसानों के 27.47 करोड़ रुपये के बकाया मुआवजे का मामला उठाया। सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया।
वहीं, विधायक हीरालाल अलावा द्वारा आदिवासी जमीनों के नामांतरण का मुद्दा उठाए जाने पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने आश्वासन दिया कि बिना अनुमति गैर-आदिवासियों के नाम दर्ज की गई जमीनों के नामांतरण निरस्त किए जाएंगे और संबंधित भूमि आदिवासी परिवारों को वापस दिलाई जाएगी।
पंचायत भवन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की घोषणाएं
पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने सदन में घोषणा की कि जिन गांवों में पंचायत भवन या सामुदायिक भवन नहीं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य कराया जाएगा।वहीं, उच्च शिक्षा मंत्री ने भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय से पेपर लीक की शिकायत सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि परीक्षा परिणाम समय पर जारी करने के लिए डिजिटल वैल्यूएशन सिस्टम लागू किया जा रहा है।