भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्ति या कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में किए जाने वाले अंतिम भुगतान (फाइनल पेमेंट) की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब सभी प्रकरणों का निपटारा कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा। भुगतान और उससे जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं के लिए संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा को अधिकृत किया गया है।
भविष्य निधि कटौती का ऑनलाइन सत्यापन, चार माह पहले करना होगा आवेदन
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार कर्मचारी हर महीने कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के जरिए अपनी भविष्य निधि (जीपीएफ) कटौती का विवरण देख सकेंगे। यदि किसी प्रकार की त्रुटि सामने आती है तो वे आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) को अभ्यावेदन दे सकेंगे। सेवानिवृत्ति से चार महीने पहले अंशदान कटौती बंद होने के बाद कर्मचारी ब्याज की गणना का सत्यापन करेंगे और इसी अवधि में अंतिम भुगतान के लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा।
बैंक खाते में बदलाव नहीं, ओटीपी रखना होगा सुरक्षित
ऑनलाइन आवेदन जमा करने से लेकर अंतिम भुगतान प्राप्त होने तक कर्मचारी अपने वेतन से जुड़े बैंक खाते में कोई बदलाव नहीं कर सकेंगे। आवेदन के दौरान प्राप्त होने वाले ओटीपी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी कर्मचारी की होगी। आवेदन का मिलान विभाग में उपलब्ध पासबुक और सेवा पुस्तिका से किया जाएगा तथा संबंधित दस्तावेजों को स्कैन कर कोषालयीन प्रणाली पर अपलोड किया जाएगा।
छह माह से वेतन वाले खाते में ही पहुंचेगी राशि
आहरण एवं संवितरण अधिकारी से प्राप्त प्रकरणों की जांच के बाद संचालक पेंशन द्वारा भुगतान आदेश जारी किए जाएंगे। अंतिम भुगतान की राशि सीधे उसी बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिसमें सेवानिवृत्ति से पहले लगातार छह महीने तक वेतन जमा हुआ हो।
कर्मचारी की मृत्यु होने पर ऐसे होगा भुगतान
यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो संबंधित कार्यालय नाम, जन्मतिथि और बैंक खाते का सत्यापन करेगा। जानकारी अधूरी होने की स्थिति में परिवार के सदस्यों से आवश्यक जानकारी लेकर रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा। भुगतान नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में किया जाएगा। यदि नामांकित व्यक्ति नाबालिग है तो वैध अभिभावक के साथ संयुक्त बैंक खाते में राशि जमा कराई जाएगी।
1 जुलाई 2026 से लागू होंगे सख्त नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई 2026 के बाद विभागीय भविष्य निधि जमाशेष में किसी भी प्रकार का संशोधन केवल प्रमाणित दस्तावेजों और विभागाध्यक्ष की अनुशंसा के आधार पर संचालक पेंशन स्तर से ही किया जा सकेगा। वहीं, ऑनलाइन जारी किया गया प्राधिकार पत्र केवल छह माह तक ही वैध रहेगा।