वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए युद्धविराम और संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि बातचीत की जरूरत अमेरिका को नहीं, बल्कि ईरान को थी। उनका दावा है कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है, जिसके चलते तेहरान को समझौते का रास्ता अपनाना पड़ा। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगी और समझौते की 60 दिन की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी तरह की राहत या आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी।
'ईरान खत्म हो चुका है, उन्हें एक पैसा भी नहीं मिलेगा'
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा कि अमेरिका किसी मजबूरी में बातचीत के लिए नहीं आया था, बल्कि ईरान खुद समझौते के लिए आगे बढ़ा। उन्होंने कहा, "हम नहीं मिले थे, ईरान मिला था। वे खत्म हो चुके हैं। हम 60 दिन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा, एक पैसा भी नहीं।" ट्रंप का दावा है कि हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की ताकत पहले जैसी नहीं रही और उसकी आर्थिक स्थिति भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
आलोचकों पर भी बरसे ट्रंप
ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और समझौते की आलोचना करने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। उनके अनुसार, युद्ध के बाद ईरान की स्थिति कमजोर हुई है और यही वजह है कि उसे बातचीत की मेज पर आना पड़ा।
अमेरिका रखेगा हर गतिविधि पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि वाशिंगटन ईरान के हर कदम पर नजर रखेगा। जब तक समझौते की सभी शर्तों का पालन नहीं होता, तब तक किसी प्रकार की आर्थिक रियायत या प्रतिबंधों में ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में भी अमेरिका ईरान के प्रति सख्त रुख बनाए रखेगा।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को दी थी चेतावनी
इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि—
ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर तबाह कर दिए गए हैं।
ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
तेहरान को अपना व्यवहार बदलना होगा, तभी उसे किसी समझौते का लाभ मिल सकेगा।
ईरान को क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवाद को समर्थन देना बंद करना होगा।
खराब आर्थिक स्थिति से बाहर निकलने के लिए उसे वैश्विक समुदाय का विश्वास जीतना होगा।
भविष्य के समझौते में ऐसे मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाई जाएगी, जो दुनिया के लिए खतरा बन सकते हैं।
फिलहाल, ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत और समझौते की शर्तों पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।