भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अतिथि शिक्षकों की री-जॉइनिंग के दौरान 90 प्रतिशत उपस्थिति (अटेंडेंस) की अनिवार्य शर्त को शिथिल करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी, जो विभिन्न कारणों से निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं कर सके थे और री-जॉइनिंग को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।
स्कूल शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अतिथि शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और उनकी व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ अतिथि शिक्षकों के हितों की रक्षा करना भी है। इसी सोच के तहत री-जॉइनिंग प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और सुविधाजनक बनाया गया है।
हजारों अतिथि शिक्षकों को होगा सीधा फायदा
प्रदेशभर में कार्यरत हजारों अतिथि शिक्षक इस फैसले से लाभान्वित होंगे। पहले री-जॉइनिंग के लिए 90 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता के कारण कई शिक्षकों के सामने कठिनाई की स्थिति बन रही थी। अब इस शर्त में राहत मिलने से अधिक संख्या में पात्र अतिथि शिक्षक आगामी शैक्षणिक सत्र में दोबारा सेवाएं दे सकेंगे।शिक्षकों का मानना है कि सरकार का यह फैसला उनके रोजगार और भविष्य की दृष्टि से राहत देने वाला साबित होगा।
शिक्षा विभाग जारी करेगा विस्तृत दिशा-निर्देश
सरकार के फैसले के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इनमें री-जॉइनिंग की प्रक्रिया, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अन्य प्रशासनिक प्रावधानों को स्पष्ट किया जाएगा, ताकि जिले और स्कूल स्तर पर प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिथि शिक्षकों की समय पर री-जॉइनिंग से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर होगी और नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। इससे विद्यार्थियों को नियमित शिक्षण कार्य का लाभ मिलेगा और स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी।
सरकार ने मांगों को ध्यान में रखकर लिया फैसला
बताया जा रहा है कि अतिथि शिक्षक लंबे समय से री-जॉइनिंग की शर्तों में बदलाव और उपस्थिति नियमों में राहत की मांग कर रहे थे। सरकार ने इन मांगों पर विचार करने के बाद 90 प्रतिशत अटेंडेंस की अनिवार्यता को शिथिल करने का फैसला लिया है। इसे अतिथि शिक्षकों के हित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।