मध्य प्रदेश में सड़क परिवहन व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक जहां टोल टैक्स मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और कुछ चुनिंदा सड़कों तक सीमित था, वहीं जल्द ही राज्य के स्टेट हाईवे (State Highways) पर भी टोल वसूली का रास्ता साफ हो सकता है। सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026 में सरकार ने ऐसे प्रावधान किए हैं, जिनके तहत राज्य सरकार किसी भी सड़क को राज्य राजमार्ग घोषित कर सकेगी, उस पर टोल शुल्क तय कर सकेगी और सड़क के निर्माण, संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों (Private Agencies) को सौंप सकेगी। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो आने वाले समय में प्रदेश के कई स्टेट हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों को भी टोल टैक्स देना पड़ सकता है।
क्या है नया राजमार्ग संशोधन विधेयक?
सरकार द्वारा पेश किए गए मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026 का मुख्य उद्देश्य राज्य की सड़कों के रखरखाव और विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार सरकार को अधिकार होगा कि-
किसी सड़क को स्टेट हाईवे घोषित कर सके।
राज्य राजमार्गों के उपयोग पर निर्धारित टोल शुल्क वसूल सके।
सड़कों के निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए निजी कंपनियों के साथ अनुबंध कर सके।
सड़कों की गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को दे सके।
सरकार यह बदलाव क्यों कर रही है?
प्रदेश में स्टेट हाईवे का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही इन सड़कों के रखरखाव पर होने वाला खर्च भी हर साल बढ़ता जा रहा है। सरकार का मानना है कि निजी भागीदारी (PPP मॉडल) से-
सड़कों का रखरखाव बेहतर होगा।
सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा।
यात्रियों को बेहतर सड़क सुविधाएं मिलेंगी।
सड़कों की समय पर मरम्मत और उन्नयन संभव होगा।
क्या सभी स्टेट हाईवे पर लगेगा टोल?
नहीं।
विधेयक में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि प्रदेश के सभी स्टेट हाईवे पर टोल लगेगा। सरकार को केवल यह अधिकार मिलेगा कि आवश्यकता और अधिसूचना के आधार पर कुछ सड़कों को राज्य राजमार्ग घोषित कर उन पर टोल लागू किया जा सके। किन-किन सड़कों पर टोल लगेगा, इसका फैसला बाद में अलग से किया जाएगा।
निजी एजेंसियों की क्या होगी भूमिका?
संशोधन के बाद सरकार निजी एजेंसियों के साथ समझौता कर सकेगी।
इनकी जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है-
सड़क निर्माण
सड़क चौड़ीकरण
नियमित मरम्मत
टोल संचालन
सड़क सुरक्षा व्यवस्था
सुविधाओं का रखरखाव
इस मॉडल का उद्देश्य बेहतर गुणवत्ता की सड़कें उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
किन लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
यदि भविष्य में स्टेट हाईवे पर टोल लागू होता है तो सबसे अधिक असर-
रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों,
ट्रांसपोर्ट कंपनियों,
बस ऑपरेटरों,
टैक्सी संचालकों,
व्यापारियों,
ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में आने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किन सड़कों को टोल के दायरे में लाया जाता है।
विधानसभा में पेश हुए 14 बड़े विधेयक
राजमार्ग संशोधन विधेयक के अलावा सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण बिल भी पेश किए।
| प्रमुख विधेयक | उद्देश्य |
|---|---|
| समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक | समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा |
| राजमार्ग संशोधन विधेयक | स्टेट हाईवे पर टोल और निजी भागीदारी |
| धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक | उज्जैन में नया स्वास्थ्य विश्वविद्यालय |
| आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन | मेडिकल शिक्षा का पुनर्गठन |
| ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक | निवेश और उद्योग को बढ़ावा |
| श्रम शक्ति संहिता | राज्य के श्रम कानूनों का एकीकरण |
| GST एवं VAT संशोधन | कर प्रशासन में बदलाव |
| पंचायत राज संशोधन | स्थानीय शासन व्यवस्था में सुधार |
उज्जैन में बनेगा नया स्वास्थ्य विश्वविद्यालय
सरकार ने मध्य प्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026 भी पेश किया है।
इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत-
भोपाल
इंदौर
ग्वालियर
उज्जैन
नर्मदापुरम
चंबल
संभागों के मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, आयुष और अन्य स्वास्थ्य संस्थान आएंगे। जबकि जबलपुर स्थित वर्तमान आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के अधीन-
जबलपुर
सागर
रीवा
शहडोल संभाग के कॉलेज रहेंगे।
7 पुराने कानून होंगे खत्म
सरकार ने निरसन विधेयक-2026 के जरिए ऐसे 7 पुराने और अप्रचलित कानूनों को समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा है, जिनका वर्तमान समय में कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं रह गया है।
श्रम कानूनों में भी होगा बड़ा बदलाव
राज्य सरकार 6 श्रम कानूनों को मिलाकर एक नई मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता लागू करने की तैयारी में है। इसमें-
काम के घंटे,
कार्यस्थल की सुरक्षा,
महिलाओं की रात्रिकालीन ड्यूटी,
नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
क्या अभी से स्टेट हाईवे पर टोल देना होगा?
नहीं।
फिलहाल विधानसभा में केवल विधेयक पेश किया गया है। इसके कानून बनने और बाद में सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही किसी सड़क पर टोल लागू किया जा सकेगा।