MP Uniform Civil Code News: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब लिव-इन में रहने वाले कपल्स को 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
MP UCC Bill क्या है? मध्य प्रदेश में क्यों चर्चा में है समान नागरिक संहिता
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) बिल को मंजूरी दे दी गई है। इस कानून के लागू होने के बाद प्रदेश में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों को लेकर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। UCC का सबसे ज्यादा असर लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बनाए गए नियमों पर दिखाई दे रहा है। नए प्रावधानों के तहत अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने रिश्ते की जानकारी सरकार के रिकॉर्ड में दर्ज करानी होगी।
MP में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
नए UCC नियमों के अनुसार, मध्य प्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप शुरू होने के 30 दिन के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार के पास डिक्लेरेशन देना अनिवार्य होगा। यह नियम अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) वर्ग को छोड़कर सभी नागरिकों पर लागू होगा। यानी जो भी कपल लिव-इन रिलेशनशिप में रहना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के अंदर इसकी जानकारी देनी होगी।
लिव-इन रजिस्ट्रेशन में देनी होगी पूरी जानकारी
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान कपल को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, उम्र, पहचान और रिश्ते से जुड़ी जरूरी जानकारी रजिस्ट्रार को देनी होगी। रजिस्ट्रेशन के बाद इसका रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना और कानूनी विवादों को कम करना बताया जा रहा है।
21 साल से कम उम्र होने पर माता-पिता को मिलेगी सूचना
UCC के तहत यदि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले किसी एक पार्टनर की उम्र 21 साल से कम है, तो रजिस्ट्रार इसकी जानकारी उसके माता-पिता या अभिभावकों को देगा। इस प्रावधान के जरिए कम उम्र के युवाओं से जुड़े मामलों में परिवार को जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।
लिव-इन खत्म करने के लिए भी रजिस्ट्रार को देनी होगी जानकारी
नए नियमों में सिर्फ लिव-इन शुरू करने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि इसे खत्म करने के लिए भी नियम तय किए गए हैं। अगर कोई कपल लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त करना चाहता है, तो उसे रजिस्ट्रार के सामने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। इसके बाद रिकॉर्ड में संबंध खत्म होने की जानकारी दर्ज की जाएगी।
MP UCC में लिव-इन रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर कितनी सजा होगी?
मध्य प्रदेश UCC के तहत बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
नियमों के अनुसार:
- बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहने पर 3 महीने तक की जेल और 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर 6 महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
गलत जानकारी देने पर भी होगी कानूनी कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति लिव-इन रजिस्ट्रेशन के दौरान गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छिपाता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
शादीशुदा व्यक्ति नहीं रह सकेगा किसी और के साथ लिव-इन में
UCC के तहत शादीशुदा लोगों के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। कोई भी व्यक्ति बिना कानूनी तलाक लिए किसी दूसरे व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकता। अगर कोई व्यक्ति अपनी शादी की जानकारी छिपाकर लिव-इन में रहता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामले में 5 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है।
लिव-इन पार्टनर को मिलेगा भरण-पोषण का अधिकार
नए कानून में महिला पार्टनर के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया है। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो महिला अदालत के माध्यम से भरण-पोषण या गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है। कानून में महिला को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए यह प्रावधान शामिल किया गया है।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार
UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को पूर्ण कानूनी अधिकार दिए जाएंगे। ऐसे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में बराबर अधिकार मिलेगा और उनकी कानूनी स्थिति को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
MP UCC Live-in Rules: क्या है उम्र सीमा
- लिव-इन रिलेशनशिप के लिए न्यूनतम उम्र सीमा भी तय की गई है।
- महिला पार्टनर की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- पुरुष पार्टनर की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए।
MP UCC Bill का असर किन लोगों पर होगा?
मध्य प्रदेश में लागू होने वाले इन नियमों का असर शादी, लिव-इन रिलेशनशिप, तलाक, बच्चों के अधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े लोगों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाना है, जबकि विपक्ष और कानून विशेषज्ञ इसके अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं।
MP UCC Law: आने वाले समय में बढ़ सकती है कानूनी चर्चा
समान नागरिक संहिता को लेकर देशभर में लंबे समय से बहस जारी है। मध्य प्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नए नियम लागू होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब लोगों की नजर इसके क्रियान्वयन और कानूनी प्रभाव पर रहेगी।