मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुका है। हालांकि, इस विधेयक पर सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर टकराव देखने को मिला। कांग्रेस ने बिल को सेलेक्ट कमेटी (प्रवर समिति) के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का संशोधन प्रस्ताव भी खारिज कर दिया गया। लगातार हंगामे और दो बार कार्यवाही स्थगित होने के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने बिल को पारित घोषित कर दिया।
क्या हुआ विधानसभा में? पूरा घटनाक्रम समझिए
मानसून सत्र के दूसरे दिन सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक चर्चा के लिए सदन में रखा। जैसे ही चर्चा शुरू हुई, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बिल को प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेजने की मांग रखी। कांग्रेस का तर्क था कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर विस्तृत विचार-विमर्श होना चाहिए। सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और विधेयक पर सदन में ही चर्चा जारी रखी।
आरिफ मसूद का संशोधन प्रस्ताव क्यों हुआ खारिज?
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने UCC विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों और संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए बदलाव की मांग की। लेकिन सदन ने इस संशोधन को स्वीकार नहीं किया और प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके बाद कांग्रेस ने विरोध तेज कर दिया।
सदन में जमकर हंगामा, दो बार रुकी कार्यवाही
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के चलते-
पहली बार कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित हुई।
बाद में फिर 15 मिनट के लिए सदन रोकना पड़ा।
इसके बावजूद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और सरकार ने बिल पारित करा लिया।
कांग्रेस ने किन आधारों पर किया विरोध?
विपक्ष ने कई मुद्दे उठाए-
बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग।
संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हवाला।
इसे राजनीतिक एजेंडा बताया।
OBC आरक्षण को ज्यादा जरूरी मुद्दा बताया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस समय प्रदेश में 27% OBC आरक्षण जैसे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
बीजेपी ने क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि- यह सरकार का नहीं बल्कि जनता के सुझावों पर आधारित विधेयक है। उन्होंने दावा किया कि UCC पर करीब 10 लाख लोगों से सुझाव प्राप्त किए गए। वहीं भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि कांग्रेस चाहे जितना विरोध करे, प्रदेश में UCC लागू होकर रहेगा। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में कहा कि-
यह महिला सशक्तिकरण का कानून है।
यह सामाजिक समानता और सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा कदम है।
सभी दलों को इसका समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन के दौरान वर्ष 1947 के भोपाल के इतिहास का भी उल्लेख किया और कहा कि उस समय भोपाल को पाकिस्तान से मिलाने की कोशिश हुई थी।
सदन के बाहर भी कांग्रेस का विरोध
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने सांकेतिक नाटक प्रस्तुत कर सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि-
सरकार युवाओं, किसानों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
सांप्रदायिक मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है।
UCC लागू होने के बाद क्या बदल सकता है?
सरकार के अनुसार UCC लागू होने का उद्देश्य-
सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून,
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एकरूपता,
महिलाओं को अधिक कानूनी अधिकार,
सामाजिक समानता को बढ़ावा है। हालांकि, कानून के विभिन्न प्रावधानों और लागू होने की प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत अधिसूचनाएं अलग से जारी की जाएंगी।