भारत के लिए आज खास दिन हैं। देश को आज स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत (INS VIKRANT) मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इसे भारतीय नौसेना को सौंपेंगे। INS Vikrant एक स्वदेशी युद्धपोत है। INS Vikrant को जनवरी 1997 को नेवी से रिटायर कर दिया गया था। अब करीब 25 साल बाद एक बार फिर INS विक्रांत का पुनर्जन्म हो रहा है। नया विक्रांत नई तकनीकों से लैस है।
दो फुटबॉल मैदानों के बराबर
INS विक्रांत के फ्लाइट डेक का एरिया दो फुटबॉल मैदानों के बराबर है, जो मोटे तौर पर 12,500 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल है। विक्रांत में स्काई-जंप से सुसज्जित एक छोटा रनवे और एक लंबा रनवे है। विक्रांत को बनाने में 20,000 करोड़ रुपये का लागत आई है, जो 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है, और इसका 45,000 टन है। इसमें मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पीटल है।
स्वदेशी युद्धपोत में 76% स्वदेशी उपकरण लगे हैं
INS विक्रांत का कुल वजन 45000 टन है। पहले स्वदेशी युद्धपोत में 76% स्वदेशी उपकरण लगे हैं। इस पर 450 किमी मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल भी तैनात रहेगी। इसमें एक पूल, किचन और महिलाओं के लिए खास केबिन हैं, और जाहिर है, जहाज में लड़ाकू विमानों को ले जाने, हथियार देने और पुनर्प्राप्त करने की तकनीक है।
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विक्रांत में 2,300 कंपार्टमेंट के साथ 14 डेक हैं
नए INS विक्रांत में 30 एयरक्रॉफ्ट तैनात हो सकेंगे। इसके अलावा इससे मिग 29K फाइटर जेट भी उड़ान भर पाएंगे। इसपर हलके लड़ाकू विमान, MIG-29, मल्टी रोल हेलिकाप्टर तैनात होंगे। विक्रांत में 2,300 कंपार्टमेंट के साथ 14 डेक हैं जो लगभग 1,500 जवानों को ले जा सकती। भोजन के लिए इसमें मॉडर्न किचन है, जिसमें 10000 रोटियां बनाई जा सकती है। इसके जनरेटर से 88 मेगावाट बिजली पैदा होगी। जो कोच्ची जैसे शहर के बराबर है।
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