कर्नाटक में जीका वायरस का पहला मामला सामने आया है। 5 साल की एक बच्ची में जीका वायरस की पुष्टि हुई है। पुणे के लैब से मिली रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। बच्ची के परिजन को एहतियाती उपाय करने की सलाह दी गई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर के सुधाकर ने कहा, “राज्य में ये पहला मामला है और सरकार बहुत सावधानी से स्थिति की निगरानी कर रही है। हमारा विभाग इससे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में पुणे के बावधन में एक 67 वर्षीय व्यक्ति जीका वायरस की पुष्टि हुई थी। शख्स नासिक का रहने वाला था और 6 नवंबर को पुणे आया था। 16 नवंबर वो बुखार, खांसी, जोड़ों में दर्द और थकान के चलते जहांगीर अस्पताल पहुंचा और 18 नवंबर को एक प्राइवेट लैब में जीका वायरस का पता चला। स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि मरीज की हालत ठीक है। उसे कोई परेशानी नहीं है।
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जीका वायरस रोग को ब्राजील में 2016 के प्रकोप के बाद की महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमारियों में से एक माना जाता है। मुख्य रूप से एडीज मच्छर के वायरस की वजह से होता है, जो दिन के वक्त काटता है। इस बीमारी के लक्षणों में हल्का बुखार, चकत्ते, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, अस्वस्थता या सिरदर्द शामिल है। 1947 में युगांडा में जीका वन में इसकी खोज के बाद से अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत द्वीप समूह से जीका के कई मामलों की सूचना मिली है।
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