कोलकाता डेस्क: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसा विशाल ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखकर हर कोई उसके पहियों की संख्या गिनने पर मजबूर हो रहा है। करीब 100 फीट लंबे इस मल्टी-एक्सल ट्रेलर में कुल 308 पहिये लगाए गए हैं। इस पर करीब 200 टन वजन का एक विशाल औद्योगिक वेसल लदा हुआ है, जिसे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर स्थित चीनी मिल तक पहुंचाया जा रहा है।
आखिर ट्रक पर लदा क्या है?
जिस भारी मशीन को लेकर यह पूरा काफिला चल रहा है, वह कोई सामान्य मशीनरी नहीं बल्कि चीनी मिल के लिए इस्तेमाल होने वाला बड़ा वेसल यानी वैक्यूम बॉयलर है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसे बलरामपुर की चीनी मिल और उससे जुड़े एथेनॉल प्लांट में उत्पादन प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाना है। इसी भारी-भरकम मशीन को सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचाने के लिए इतने बड़े मल्टी-एक्सल ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है।
बेल्जियम से शुरू हुई इस मशीन की यात्रा
यह विशाल औद्योगिक उपकरण बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए भारत लाया गया। सबसे पहले इसे ओडिशा के पारादीप पोर्ट तक पहुंचाया गया। इसके बाद यहां से मशीन को सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ले जाने का सफर शुरू हुआ। पारादीप से निकलने के बाद काफिला झारखंड होते हुए बिहार पहुंचा और रोहतास, गया, औरंगाबाद तथा कैमूर जैसे इलाकों से होकर आगे बढ़ा।
308 पहियों की जरूरत क्यों पड़ी?
करीब 200 टन के इस भारी वेसल को सामान्य ट्रक पर ले जाना संभव नहीं था। वजन को कई हिस्सों में संतुलित तरीके से बांटने और सड़क पर वाहन को नियंत्रित रखने के लिए विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है। करीब 100 फीट लंबे इस वाहन के 308 पहिये इसके विशाल वजन को संभालने में अहम भूमिका निभाते हैं।
एक दिन में सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर का सफर
इतने भारी कंसाइनमेंट को लेकर चलना सामान्य ट्रक की यात्रा जैसा नहीं है। अत्यधिक वजन और आकार के कारण इसकी रफ्तार काफी धीमी रखी गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में इसकी दैनिक यात्रा करीब 10 से 20 किलोमीटर बताई गई है। यही वजह है कि पारादीप से बलरामपुर तक इसका सफर कई चरणों में पूरा किया जा रहा है।
रास्ते में हटाने पड़े बिजली के तार और दूसरी बाधाएं
इतने बड़े वाहन को रास्ते से निकालने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीमों को कई जगह विशेष इंतजाम करने पड़े। बिहार के औरंगाबाद में रेलवे ओवरब्रिज के पास इसे निकालने के लिए बिजली के तारों को हटाने और विशेष सर्विस लेन तैयार करने जैसी व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस दौरान रेल परिचालन भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था।
वाराणसी में भी करनी पड़ी खास तैयारी
उत्तर प्रदेश पहुंचने के बाद वाराणसी में भी इस विशाल काफिले के लिए रास्ता तैयार किया गया। ट्रेलर की चौड़ाई और ऊंचाई को देखते हुए कई जगह सड़क को चौड़ा करने, बिजली के तार और खंभे हटाने तथा फुटओवर ब्रिज के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाने की तैयारी की गई। रिपोर्टों के अनुसार, वाराणसी में तीन फुटओवर ब्रिज इसके रास्ते में बाधा बन रहे थे।
पुलिस और तकनीकी टीम भी काफिले के साथ
इतने बड़े कंसाइनमेंट को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए केवल ट्रक चालक ही जिम्मेदार नहीं है। इसके साथ तकनीकी विशेषज्ञों की टीम, पायलट वाहन और अन्य सहायता वाहन भी चल रहे हैं। अलग-अलग विभागों की टीमें रूट का निरीक्षण कर रही हैं ताकि रास्ते में आने वाली किसी बाधा को पहले ही दूर किया जा सके।
दो करोड़ रुपये तक खर्च हो चुका डीजल
इस विशाल यात्रा की लागत भी कम नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक इस काफिले में करीब दो करोड़ रुपये का डीजल खर्च हो चुका है। भारी वजन के कारण ट्रेलर की गति बेहद कम है और इसे आगे बढ़ाने के लिए विशेष लॉजिस्टिक व्यवस्था की जा रही है।
लोगों के लिए बना कौतूहल का विषय
जहां-जहां से यह 308 पहियों वाला ट्रक गुजर रहा है, वहां लोग इसे देखने के लिए रुक रहे हैं। इसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से शेयर हो रही हैं। करीब 200 टन की मशीन को लेकर चल रहा यह विशाल काफिला अपने आकार और तकनीकी इंतजामों के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
बलरामपुर में होगा अंतिम पड़ाव
अब इस विशाल वेसल को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर स्थित चीनी मिल तक पहुंचाया जाना है। वहां इसका इस्तेमाल चीनी मिल और एथेनॉल प्लांट से जुड़ी उत्पादन व्यवस्था में किया जाएगा। बेल्जियम से समुद्र के रास्ते भारत और फिर ओडिशा से सड़क मार्ग के जरिए उत्तर प्रदेश तक पहुंच रही यह मशीन देश में भारी औद्योगिक उपकरणों की लंबी दूरी की लॉजिस्टिक्स का एक बड़ा उदाहरण बन गई है।