दीपांजलि शिवहरे
महाराष्ट्र में उद्धव सरकार पर छाए संकट के बादल अब ओर भी गहराते हुए दिखाई दे रहे है। सियासी चक्रव्यू में हिचकोले खाती हुई उद्धव सरकार को बचाने का जिम्मा अब केंद्रीय नेतृत्व ने कमलनाथ को सौंप दिया है। महाराष्ट्र सरकार को बचाने के लिए कमलनाथ संकटमोचक की भूमिका में नजर आ सकते हैं। हालांकि सियासी हलकों में सवाल है कि ये जिम्मा कमल नाथ को ही क्यो दिया गया है जबकि वो खुद इसी तरह के राजनैतिक घटनाक्रम में अपनी ही सरकार गवां बैठे है। कमल नाथ को ये जिमेदारी देने के पीछे कई कारण माने जा रहे है।
कांग्रेस में सबसे भरोसेमंद मोतीलाल वोरा और अहमद पटेल के देहांत के बाद अब गांधी परिवार सबसे ज्यादा किसी पर भरोसा करता है तो वो कमल नाथ है।
कमल को शांति दूत बनाने के पीछे जी 23 भी माना जा रहा है
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी और संजय गांधी के बाद कमलनाथ को ही अपना तीसरा बेटा माना था। हालांकि कमल को शांति दूत बनाने के पीछे जी 23 भी माना जा रहा है। कांग्रेस मे G-23 बनने के बाद से ही गांधी परिवार ने कमलनाथ पर अपना भरोसा बढ़ा दिया था।
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इसके साथ ही कमल नाथ के NCP नेता शरद पवार कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण पृथ्वीराज चव्हाण जैसे नेताओं से मजबूत रिश्ते है साथ ही मुम्बई कॉरपरेट क्षेत्र में भी कमल नाथ की खासी पकड़ बताई जाती है ओर ऐसे सियासी घटना क्रम में पर्दे में पिछे से किसी कॉरपोरेट के हाथ होने से इनकार नही किया जा सकता। जिसके चलते केंद्रीय नेतृत्व ने तुरुप के इक्के के रूप में कमल नाथ आगे बढ़ाया है। उधर मुम्बई पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि यह सौदे की राजनीति है पैसे की राजनीति हो रही है, हमारे संविधान के विपरीत है। जहाँ तक कांग्रेस की बात है कांग्रेस के विधायक बिकाऊ नहीं है। कांग्रेस के विधायक टिके रहेंगे।
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