Supreme court ने नोटबंदी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। Supreme court ने केंद्र की मोदी सरकार के 2016 में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले को सही बताया हैं। नोटबंदी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
इस मामले कर सुप्रीम कार्ट ने कहा कि, नोटबंदी के पहले केंद्र सरकार और RBI के बीच सलाह-मशविरा हुआ था। दोनों के बीच हुई बातचीत बिल्कुल थी। सुप्रीम कार्ट ने आगे कहा कि, इस दौरान संवैधानिक नियमों का पालन किया गया था।
इससे पहले जस्टिस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने पांच दिन की बहस के बाद 7 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनाने वाली बेंच में जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस ए.एस. बोपन्ना, जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन, और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना शामिल रहे।
8 नवंबर 2016 को हुई थी नोटबंदी
आपको बता दें कि, केंद्र की मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को अचानक बड़ा फैसला लेते हुए देश में नोटबंदी लागू की दी। इसके तहत 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। नोटबंदी के बाद पूरे देश में नोट बदलवाने के लिए लोगों को लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ा था। वहीं नोटबंदी के फैसले के खिलाफ 58 याचिकाएं दाखिल की गई थी।
2000 के नोट हुए गायब!
देश में 2000 के नोट सबसे ज्यादा साल 2017-18 के दौरान चलन में रहे। उस समय बाजार में 2000 के 33,630 लाख नोट थे, जिनकी संख्या साल दर साल कम होती गई। RBI के अनुसार, 2000 के नोट लोग पसंद नहीं करते इसलिए 2019 में ही इसे छापना बंद कर दिया था। वहीं कई एक्सपर्ट मानते हैं कि, काला धन जमा करने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल 500 और 2000 के नोटों का होता है। शायद इसी वजह से 2019 से 2000 के नोटों की छपाई ही बंद है।
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