- MBBS के छात्रों के लिए राहत भरी खबर
- बिना परीक्षा के डिग्री देने का फैसला
- लाइसेंसिंग एग्जाम को रद्द करने का फैसला लिया
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र कुछ दिनों से परेशान हैं। रुस और यूक्रेन के बीच हो रहा युद्ध कब खत्म होगा और छात्र वहां दोबारा कब लोटेंगे इसे लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन इन सब के बीच वहां पढ़ाई करने वाले MBBS के छात्रों के लिए राहत भरी खबर आई है। यूक्रेन सरकार ने फाइनल ईयर के छात्रों को बिना परीक्षा के डिग्री देने का फैसला किया है।
छात्रों को दो एग्जाम अलग से पास करने होते है
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूक्रेन की सरकार ने लाइसेंसिंग एग्जाम को रद्द करने का फैसला लिया है। अब बिना इस परीक्षा के ही छात्रों को MBBS की डिग्री मिल जाएगी। बता दें कि यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को दो एग्जाम अलग से पास करने होते हैं। इस परीक्षा को KROK-1 और KROK-2 का नाम दिया जाता है। मेडिकल के छात्रों को तीसरे साल में KROK-1 की परीक्षा पास करनी होती है। और आखिरी यानी चौथे साल में KROK-2 में पास होना होता हैं। इसके बाद ही उन्हें फाइनल डिग्री दी जाती है।
सरकारी हॉस्पिटल में इंटरनशिप करवाने का वादा
यूक्रेन की सरकारी वेबसाइट पर अपलोड की गई नोटिफिकेशन के अनुसार KROK-1 को अगले वर्ष के लिए रद्द कर दिया गया है। और KROK-2 को इस साल के लिए कैंसिल किया गया है। पश्चिम बंगाल के एक छात्र सुधाज्योति सिंघा ने बताया कि ये खबर स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। उन्होंने अखबार को बताया, बंगाल में कुल मिलाकर हम 13 स्टूडेंट्स है। राज्य सरकार ने हमें पहले ही सरकारी हॉस्पिटल में इंटरनशिप करवाने का वादा किया है।
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सबसे चुनौतीपूर्ण काम पूरा हो गया
आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को संसद में चल रहे बजट सत्र के दौरान कहा था कि रुसी आक्रमण के बीच यूक्रेन से फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण काम पूरा हो गया है। केंद्र सरकार के ऑपरेशन गंगा के चलते 20,000 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बाहर निकाला। इनमें अधिकतर छात्र थे।
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