रुखसार जहां
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक में एक स्कूल पिछले 22 सालों से भवन के इंतजार में है। भवन नहीं होने के चलते स्कूल कच्चे मकान में संचालित हो रहा है। जहां बच्चों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। बता दें कि 22 सालों में इस स्कूल के लिये 2 बार भवन की स्वीकृती हुई। लेकिन पूरी राशि को दोनों बार बंदरबांट कर लिया गया। जिसका खामियाजा आज तक नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है।

जिले के 300 से ज्यादा स्कूल जर्जर
बलरामपुर जिले में कुल 2 हजार 25 स्कूल संचालित है। जिसमें से लगभग 300 से भी ज्यादा स्कूल जर्जर हालत में हैं। वहीं 25 से ज्यादा स्कूलों को आज तक भवन भी नसीब नहीं हुआ है।
प्राथमिक शाला महुली और माध्यमिक शाला कोयाम पारा का भी यही हाल
कुछ ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत महूली का भी है। जहां प्राथमिक शाला महुली और माध्यमिक शाला कोयाम पारा के लिये दो भवनों की स्वीकृति हुई। लेकिन दोनों भवनों की राशि का भी बंदरबांट कर लिया गया, और स्कूल भवन को गौशाला में तब्दील कर दिया गया। बच्चों को मजबूरी में पंचायत भवन के ही एक कमरे में पढ़ाया जा रहा है।
इसी क्षेत्र से विधायक हैं प्रदेश में शिक्षा मंत्री
बता दे कि वर्तमान में इसी विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश के शिक्षा मंत्री भी चुने गये हैं। वहीं इसी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की सरकार में गृह मंत्री भी बनाये गये थे। बावजूद इसके जिले में शिक्षा का हाल बेहाल है। हालांकि मामले में कलेक्टर BEO और DEO पर सख्त कार्रवाई की बात करते नजर आ रहे हैं।
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