देश में पहचान से जुड़े दस्तावेजों को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए सरकार लगातार नई व्यवस्थाएं लागू कर रही है। इसी क्रम में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र को आधार से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए निर्णय लिया है कि राज्य में जन्म प्रमाण पत्र बनवाते समय माता-पिता की आधार संख्या दर्ज करना अनिवार्य होगा, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र में मृतक की आधार संख्या को जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य नागरिक अभिलेखों को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है।
फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने का प्रयास
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में कई बार गलत सूचनाओं या फर्जी दस्तावेजों की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था के तहत आधार संख्या के माध्यम से सत्यापन की प्रक्रिया मजबूत होगी, जिससे प्रमाण पत्र जारी करते समय जानकारी की पुष्टि करना आसान हो जाएगा। इससे न केवल फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगेगी, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बन सकेगा।
प्रशासनिक स्तर पर लिए गए अहम निर्णय
इस संबंध में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासनिक स्तर पर कई निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने की, जिसमें संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को आधार संख्या से जोड़ने की तैयारी जल्द पूरी की जाए। इसके साथ ही प्रमाण पत्रों को केंद्रीय नागरिक पंजीकरण प्रणाली से जोड़ने का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिससे डेटा का त्वरित सत्यापन संभव हो सकेगा।
लंबित मामलों के समाधान की भी योजना
बैठक में पिछले एक वर्ष से लंबित पड़े मामलों को जल्द निपटाने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए नागरिक पंजीकरण पोर्टल और न्यायिक मामलों से जुड़े पोर्टल को आपस में जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इस कदम से प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया तेज होगी और लोगों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से रिकॉर्ड का रखरखाव भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
अस्पतालों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका
नई व्यवस्था को लागू करने में अस्पतालों, नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जन्म प्रमाण पत्र जारी करते समय अस्पतालों को माता-पिता की आधार संख्या दर्ज करनी होगी, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए संबंधित संस्थाओं को मृतक की आधार जानकारी सुनिश्चित करनी होगी। सभी सूचनाओं का सत्यापन पूरा होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकेगी।
देशभर में लागू होने की संभावना
यदि उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधार से जुड़े सत्यापन तंत्र के माध्यम से नागरिक अभिलेखों की गुणवत्ता में सुधार होगा और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करना भी आसान हो जाएगा। इस प्रकार यह पहल प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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