आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे सियासी संकट पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर पार्टी सही दिशा में काम कर रही होती, तो राघव चड्ढा जैसे नेता और अन्य राज्यसभा सदस्य उसे छोड़ने का फैसला नहीं करते।
नेताओं के इस्तीफे के पीछे ‘गंभीर वजह’ का संकेत
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में बोलते हुए हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की आज़ादी है, लेकिन जब बड़े नेता पार्टी छोड़ते हैं तो इसके पीछे कोई न कोई ठोस कारण जरूर होता है। उनके मुताबिक, नेताओं को अंदरूनी स्तर पर समस्याओं का सामना करना पड़ा होगा, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
राघव चड्ढा और संदीप पाठक का बड़ा फैसला
इससे पहले राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP से इस्तीफा देने और बीजेपी में शामिल होने का ऐलान किया। चड्ढा ने दावा किया कि पार्टी के करीब दो-तिहाई राज्यसभा सदस्य अब अलग गुट बनाकर काम करेंगे, जिससे पार्टी में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है।
नेतृत्व पर उठे सवाल
हजारे ने बिना नाम लिए पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा हालात नेतृत्व की कमजोरी को दर्शाते हैं। उनका मानना है कि यदि संगठन मजबूत होता, तो इस तरह की टूट की स्थिति पैदा नहीं होती।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से बनी थी पार्टी
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP की शुरुआत साल 2012 में हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से प्रेरित होकर हुई थी। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो उसके भविष्य पर भी सवाल खड़े करता है।